बेवफ़ाई

जब दिल टूटता है

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Aakash Tiwaari


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सच्चा वैलेंटाइन ***आत्मकथा*** “Valentine Contest”

Posted On: 14 Feb, 2011  
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क्या हुआ अगर……गज़ल

Posted On: 3 Jan, 2016  
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यादे मिटती नही….गज़ल

Posted On: 2 Mar, 2015  
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बहुत याद आते है….गज़ल

Posted On: 2 Apr, 2014  
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मुहब्बत को अपना रोजगार बना दिया……गज़ल

Posted On: 28 Mar, 2014  
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अश्क …गज़ल

Posted On: 25 Mar, 2014  
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“आकाश” लिखना बाकी है……

Posted On: 4 Jan, 2014  
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मै आउंगा ………..

Posted On: 6 Nov, 2013  
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अब बलात्कार नहीं करूँगा …..

Posted On: 18 Dec, 2012  
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लोग सवाल हजार करते है…..ग़ज़ल

Posted On: 8 Dec, 2012  
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के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

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मुहब्बत और व्यापार को एक केंद्र पर लाती हुई रचना..................सिस्टम से शिकायत को बहुत ही संजीदा ढंग से व्यक्त करती है......................पर मेरे समझ से तो प्यार कुछ ऐसा होता है...................बाकी प्यार को लेकर जो भी अवाधार्नाएं पाली गई है या तो उनमें बचपना झलकता है या फिर मुर्खता.................. शायद प्यार को किसी ने समझा ही नहीं, कोई मुझसे भी तो पूछे प्यार क्या होता है? इसमे न मिलने की ख़ुशी, न बिछड़ने का गम होता है, न यह किसी से अधिक, न किसी से कम होता है, न ही यह सुखा , न ही नम होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई आम , न कोई खास होता है, न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई तृप्ति, न कोई उपवास होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जीत, न कोई हार होती है, न कोई बद्दुवा, न कोई दुआ होती है, न किसी से ना, ना हाँ होती है. सच तो यह है;आँखों से मिलने से पहिले और होठों के मिलने के बाद सिर्फ प्यार होता है. इसमे ना कोई हीर, ना राँझा होता है, न कोई अलग, न जुड़ा होता है, न कोई बंदा, न खुदा होता है. सच तो यह है, तुमसे, उससे, मुझसे हम सबसे प्यार जुदा होता है. इसमे न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई इजहार, न कोई इंकार होता है, न यह एक बार, न हजार बार होता है. प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जिस्म, न कोई जान होता है, न किसी का नाम, न कोई बदनाम होता है, प्यार से पहिले और प्यार के बाद, खुदा से नहीं खुद से पूछो क्या होता? मेरे ख्याल से प्यार ने एक बार होता है, न हजार बार होता है, प्यार से पहिले………… ...................अनिल कुमार 'अलीन'

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

मुहब्बत और व्यापार को एक केंद्र पर लाती हुई रचना..................सिस्टम से शिकायत को बहुत ही संजीदा ढंग से व्यक्त करती है......................पर मेरे समझ से तो प्यार कुछ ऐसा होता है...................बाकी प्यार को लेकर जो भी अवाधार्नाएं पाली गई है या तो उनमें बचपना झलकता है या फिर मुर्खता.................. शायद प्यार को किसी ने समझा ही नहीं, कोई मुझसे भी तो पूछे प्यार क्या होता है? इसमे न मिलने की ख़ुशी, न बिछड़ने का गम होता है, न यह किसी से अधिक, न किसी से कम होता है, न ही यह सुखा , न ही नम होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई आम , न कोई खास होता है, न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई तृप्ति, न कोई उपवास होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जीत, न कोई हार होती है, न कोई बद्दुवा, न कोई दुआ होती है, न किसी से ना, ना हाँ होती है. सच तो यह है;आँखों से मिलने से पहिले और होठों के मिलने के बाद सिर्फ प्यार होता है. इसमे ना कोई हीर, ना राँझा होता है, न कोई अलग, न जुड़ा होता है, न कोई बंदा, न खुदा होता है. सच तो यह है, तुमसे, उससे, मुझसे हम सबसे प्यार जुदा होता है. इसमे न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई इजहार, न कोई इंकार होता है, न यह एक बार, न हजार बार होता है. प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जिस्म, न कोई जान होता है, न किसी का नाम, न कोई बदनाम होता है, प्यार से पहिले और प्यार के बाद, खुदा से नहीं खुद से पूछो क्या होता? मेरे ख्याल से प्यार ने एक बार होता है, न हजार बार होता है, प्यार से पहिले………… ...................अनिल कुमार 'अलीन' http://merisada.jagranjunction.com/2012/04/30/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9b%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0/

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

डियर राजेश जी कोई भी अपराधी अपराध तब करता है जब उसके दिल से सजा का आतंक ख़तम हो जाता है , लेकिन अगर किसी का जीवन इतना नारकीय बन जाये के उसे जीवन बोझ लगने लगे और इस समाज को वो इसका जिम्मेदार समझे तो उसके लिए इस समाज का हर नागरिक दुश्मन के सामान है , वरना हर आतंकवादी,लूटेरा , दरिंदा अपराध तभी करता है जब या तो वोह समाज को दुश्मन समझे या उसे यह विश्वास हो की यह अपराध ही उसके जीवन को बेहतर बनाने का एक मात्र रास्ता है. आपको याद होगा की ऑस्ट्रेलिया के एक प्लेयर ने कहा था मुझे अपने जीवन से बहुत प्रेम है और इंडिया जाकर या क्रिकेट खेल कर मैं इससे खो नहीं सकता हम देखते हैं के अधिकाश अपराधी का जीवन बहुत ही निम्न कोटि का होता है और और वोह इसे बेहतर बनाने के क्रम में गुमराह हो जाते हैं. सऊदी अरब में बहुत कठोर कानून है और आपने देखा होगा की हाल में ही वहां बलात्कार के जुर्म में चार बांग्लादेशियों को सरे आम फांसी दे दी गयी थी ,इसका मतलब ये नहीं है की वहां दुराचार नहीं होता, बहुत होता है, क्योंकि उनके दिल में पकडे जाने या सजा पाने का खौफ नहीं होता , यहाँ वहां कुछ लोगों की मानसिकता इतनी विकृत हो गयी है के उन्हें भी मौत से दर नहीं लगता , जैसे की दामिनी के सन्दर्भ में एक ने खुद को फंसी दिए जाने की वकालत की है, क्योंकि उससे पता है की बहार का जीवन भी उसके लिए कोई राहुल गाँधी स्टाइल का तो हैं नहीं जो उसे अपने जीवन से प्यार हो. संछेप में, हम जबतक लोगों के दिलोन में अपने जीवन से पयार नहीं बिठायेंगे , उनको मुख्या धरा से नहीं जोड़ेंगे , उनमें क्राईम के लिए खौफ नहीं बिठाएंगे सुधार मुश्किल है

के द्वारा:

डियर राजेश जी कोई भी अपराधी अपराध तब करता है जब उसके दिल से सजा का आतंक ख़तम हो जाता है , लेकिन अगर किसी का जीवन इतना नारकीय बन जाये के उसे जीवन बोझ लगने लगे और इस समाज को वो इसका जिम्मेदार समझे तो उसके लिए इस समाज का हर नागरिक दुश्मन के सामान है , वरना हर आतंकवादी,लूटेरा , दरिंदा अपराध तभी करता है जब या तो वोह समाज को दुश्मन समझे या उसे यह विश्वास हो की यह अपराध ही उसके जीवन को बेहतर बनाने का एक मात्र रास्ता है. आपको याद होगा की ऑस्ट्रेलिया के एक प्लेयर ने कहा था मुझे अपने जीवन से बहुत प्रेम है और इंडिया जाकर या क्रिकेट खेल कर मैं इससे खो नहीं सकता हम देखते हैं के अधिकाश अपराधी का जीवन बहुत ही निम्न कोटि का होता है और और वोह इसे बेहतर बनाने के क्रम में गुमराह हो जाते हैं. सऊदी अरब में बहुत कठोर कानून है और आपने देखा होगा की हाल में ही वहां बलात्कार के जुर्म में चार बांग्लादेशियों को सरे आम फांसी दे दी गयी थी ,इसका मतलब ये नहीं है की वहां दुराचार नहीं होता, बहुत होता है, क्योंकि उनके दिल में पकडे जाने या सजा पाने का खौफ नहीं होता , यहाँ वहां कुछ लोगों की मानसिकता इतनी विकृत हो गयी है के उन्हें भी मौत से दर नहीं लगता , जैसे की दामिनी के सन्दर्भ में एक ने खुद को फंसी दिए जाने की वकालत की है, क्योंकि उससे पता है की बहार का जीवन भी उसके लिए कोई राहुल गाँधी स्टाइल का तो हैं नहीं जो उसे अपने जीवन से प्यार हो. संछेप में, हम जबतक लोगों के दिलोन में अपने जीवन से पयार नहीं बिठायेंगे , उनको मुख्या धरा से नहीं जोड़ेंगे , उनमें क्राईम के लिए खौफ नहीं बिठाएंगे सुधार मुश्किल है

के द्वारा:

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

आदरणीय आकाश तिवारी जी, बलात्कार और आतंकवाद जैसी दुखद घटनाओं और जन-पीड़ा की गंभीरता पर पठनीय आलेख; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "इस समस्या का एक पहलु और है वो है बलात्कार की घटना में स्त्री पक्ष कमजोर और असहाय होती है और बदनामी के डर से चुप रहती है इसलिए ये घटनाए दिन पर दिन बढती ही जा रही है लेकिन स्त्रियों के पीछे हटने के पीछे भी हमारे देश की अविश्वश्नीय कानून व्यवस्था है स्त्रियाँ भी जानती है की न्याय तो मिलेगा ही नहीं बस बदनामी ही मिलेगी इसलिए स्त्रियों के पैर आगे बढ़ने से रुक जाते है..सबसे पहले हमारे देश की न्याय व्यवश्ता को लोगों का विश्वाश जीतना होगा तभी कुछ हो सकता है…"

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

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के द्वारा: Aakash Tiwaari Aakash Tiwaari

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आकाश  जी आपने अपने अनुभव का वृतांत उल्लिखित करके, मेरे साथ बीती इस तरह की घटनायें याद दिला दीं।     पिछले वर्ष पत्नि के बहुत कहने पर दिल्ली के एक सबसे प्रसिद्ध  देवी मंदिर गया (सामान्यतः मैं मंदिर नहीं जाता) पत्नि ने जिद्द की कि नारियल चढ़ाना है। मैंने बहुत समझाया, तुम्हारी माँ धन-धान्य से सम्पन्न है, उसे तुम्हारे नारियल की जरूरत नहीं है तुम्हारे नारियल से उसका पेट  नहीं भर सकता। लेकिन पत्नि के जिद्द के सामने कहां चलने वाली थी। नारियल लेकर जैसे ही फोड़ने लगा। वहाँ के पंड़ित(व्यापारी) बोले यहाँ नारियल साबुत ही चढ़ाया जाता है। मैने विरोध किया यह तो गलत है। माँ साबुत नारियल खा ही नहीं सकती। अंत में नारियल फोड़ने की अनुमति मिल गई अब आई प्रसाद की बात जनाब ने सारा नारियल रख लिया और पकड़ा दिया थोड़ा सा प्रसाद बच्चा समझ कर बहलाने के लिये। मैंने कहा भाई माँ तो थोड़ा सा प्रसाद ग्रहण करगी। फिर आप सारा क्यों रख रहे हो। दलील दी गई यहाँ ऐसा ही होता है। मैंने कहा भाई प्रसाद मेरा, माँ मेरी, मुझे कितना खिलाना है और माँ को कितना खाना है। यह हम दोंनो का मामला है। आप निर्णय कैसे ले सकते हो। पंडित ने मुझे शांत रहने के लिये कहा और पीछे से सारा प्रसाद  पकड़ दिया।     बात प्रसाद या नारियल की नहीं है। इन कुरीतियों, अंधविश्वासों का विरोध करने की है। धर्म आज व्यापार बन गया है। हमें इसका भागीदार न बनके विरोध करना चाहिये।   धार्मिक भ्रष्टाचार को उजागर करती सुन्दर रचना का स्वागत है।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

सादर नमस्कार! बहुत ही विचारणीय और अर्थपूर्ण आलेख....आपने कही कही भगवन में आस्था को सिद्ध करने के लिए अंधविश्वासों का सहारा लिया. परन्तु वो भी आपके भाव के अनुसार न्याय संगत लगा.......5 star. सच पूछिये तो आज हरेक चीज का व्यवसायीकरण होता जा रहा हैं. एक बात कहना चाहूँगा, ध्यान चाहूँगा.....इब्त दायें इश्क है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है....भारत माता, भारतीय संस्कृति और मान-मर्यादा की जय का नारा बुलंद करते रहिये और पीछे से देश का............यही देशभक्ति है और इसी में हमारी इज्जत हैं.जय हो, जय हो, जय........ज्यादा परेशान मत होइए, यात्रा से थक गए होंगे थोडा आराम कर लीजिये. फिर कही-किसी मोड़ पर हमारी और आपकी मुलाकात होगी. या फिर अभी शारीर में फुर्ती है तो सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अभियान मेरा साथ दीजिये......एक लिंक दे रहा हूँ. उसे पढ़िए, विचारिये, मनन करिए और फिर जहाँ भी रहिये मस्त रहिये और व्यस्त रहिये......हार्दिक आभार. http://merisada.jagranjunction.com/2012/02/06/%E0%A4%B5%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

आकाश जी मेरी बातों को अन्यथा न लें, मैं अपने जीवन का व्यवहारिक अनुभव लिख रहा हूँ। मुहब्बत करके बहुत पछता लिया। मुहब्बत से अब बहुत दूर आ लिया। एक भी उदाहरण बता दो मेरे दोस्त, मुहब्बत से किसने क्या पा लिया। सजा कोई भी हो कट जाती है, मुहब्बत-ए-गुनाहे सजा काटे नहीं कटती। ओर भी जरूरी काम हैं जिन्दगी में, मुझे मुहब्बत अब बेकार है लगती। जो हमारे लिये नहीं है, हम उसके पीछे क्यों भागे आकाश जी, जिन्दगी प्यार से ज्यादा कीमती है, यह दोबारा नहीं मिलती। कृपया अपनी समालोचात्मक प्रतिक्रिया से अनुग्रहीत करें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/?p=60&preview=trueक्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

मेरी भावनाओं को संबल प्रदान करने के लिये मैं अपने समस्त ब्लागर भाइयों का हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ, और आपकी एकजुटता से अभिभूत भी हूँ । अब यह भी विश्वास हो चला है कि आपका आत्मसम्मान जो यहाँ आपकी एकमात्र पूँजी भी है, और उपलब्धि भी, उसके साथ खिलवाड़ करने से पहले ऐसा करने वालों को एकबार अवश्य सोचना होगा । अभी तक जो होना था, वह हो चुका, अब आगे आप सभी एकबार फ़िर अपनी सृजनशीलता का लोहा मनवाने की ओर क्रियाशील हो जायँ, मेरा यही अनुरोध होगा । आप खेदप्रकाश की भाषा देखिये, और ज़ुम्मा-ज़ुम्मा आठ दिन पूर्व ब्लागिंग से जुड़े कुछ नाबालिग प्रकार के तथाकथित विद्वान ब्लागर्स की आपको उपदेश देती भाषा पर गौर कीजिये, तो दोनों में स्पष्ट साम्य आपको दूर से ही दिखाई देगा । इन्हीं के समकालीन ज्वाइन करने वाली हमारी दूसरी विदुषी ब्लागर्स को अभी ये तक पता नहीं है कि फ़ीचर होता कैसे है, लेकिन इन्हें सारा ज्ञान हासिल हो गया कि तक़नीकी खामियों के कारण ऐसा सम्भव है । इनके बहुमूल्य विचारों से ओतप्रोत कोई ब्लाग फ़ीचर होने से क्यों नहीं मिस होता ? मेरा कहना है कि आपके बीच छद्मरूप में घुसपैठ कराकर आपका भावनात्मक शोषण करते हुए विचारों का रुख मोड़ने के हर कुत्सित षड्यंत्र से आपको सजग रहना होगा, और इसीप्रकार आगे भी किसी भी ब्लागर्स के स्वाभिमान और आत्मसम्मान पर चोट पहुँचाने के हर प्रयास का एकजुट होकर प्रतिकार के लिये तैयार रहना होगा । लेकिन हर जगह जो भी किया जाय, उसका आधार न्यायोचित ही होना चाहिये, इसका ध्यान अवश्य रखा जाय, और चार लोगों की राय से किया जाय । आप मेरी स्थिति को समझने की कोशिश करें । तत्काल ब्लाग लेखन कतई सम्भव नहीं है, लेकिन कोशिश करता हूँ कि टिप्पणियों के माध्यम से आपके साथ जुड़ा रहूँ । और कुछ करूँ या नहीं, लेकिन जहाँ आपको मेरी ज़रूरत महसूस होगी, हमेशा साथ पाएंगे । धन्यवाद !

के द्वारा:

आदरणीय श्री चातक जी, मुझे पता है की मेरी विफलता मेरी ही कमियों के कारन है तो क्या..प्यार करना गलत था..मैंने भी सोचा था की कर्म करता जा रहा हूँ सब मिल जाएगा...राखी तो गयी ही पिता जी के मामले में यही हुआ था..वो मुझे कई महीनो से बुला रहे थे अपने पास देहरादून मगर ऐसी ही कुछ बातों के कारन जा न सका..और एक दिन अचानक पिता जी की तबियत ख़राब हुई.जब तक हम सब पहुँच पाते वो वेंटीलेटर पर थे और कुछ बता भी नहीं सके..हमारा अपना न्यूज़ पेपर का व्यवसाय बर्बाद हो गया..क्यूंकि कभी हम लोग उससे नहीं जुड़े थे....बस बचपन से यही मन्त्र सरस्वती स्कूल में पढ़ा था सब्र का फल मीठा होता है..कर्म करो फल की इच्छा मत करो...यही सब..मगर श्री चातक जी..वाकई अब सब कहने की बात है...मै आपकी बातों और विचारों का बहुत सम्मान करता हूँ..आपसे बहस कर रहा हूँ इसे अन्यथा मत लीजियेगा..बस अगर छोटा भाई समझते है तो भूल समझिएगा और इन बातों में जो गलत है उसे काटकर और कुछ समझिएगा.... आपका आकाश तिवारी

के द्वारा: Aakash Tiwaari Aakash Tiwaari

प्रिय आकाश जी, यदि आपको लगता है कि ऐसी बातों की कोई जगह नहीं तो फिर आपको एक बार फिर से स्वयं का मंथन करना आवश्यक होगा क्योंकि इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है| मुझे नहीं पता कि आपको किस चीज़ के लिए पछताना पद रहा है लेकिन उसका कारण यदि आप इन पंक्तियों की मान्यता को दे रहे हैं तो फिर मैं सिर्फ इतना कहूँगा कि आपने कर्म के सिद्धांत को अभी तक समझा नहीं और ना ही उसे जीवन में उतार पाए| परन्तु अभी आपमें बहुत संभावनाएं हैं| The soon you realize that the failure is the result of your own errors or sins, the soon you will get the highway of success. If knowing this you cling to the demoralizing and debilitating habits of mind, don't make a complaint that you have fallen a victim to failures. सबसे बेहतरीन उदाहरण तो आप शाही जी का ही ले लीजिये आज जागरण ने स्वयं अपनी स्थिति स्पष्ट की है लेकिन जल्दबाजी में कुछ ब्लोगरों ने मंच छोड़ने जैसी बातें कह कर शाही जी के कर्मबल पर संख्याबल की मुहर लगा दी है, कुछ लोग ये भी सोच सकते हैं कि शाही जी के साथ ब्लागरों की लामबंदी ने जागरण से ये काम करवाया जबकि जागरण की मेल बता रही है कि मंडल ने बड़े तटस्थ भाव से शाही जी के कर्म और उनकी सही सोच को सम्मान दिया है| आप भी कर्मबल पर निष्ठा धारण करें सिर्फ सफलता ही मिलेगी| आपका चातक

के द्वारा: chaatak chaatak

के द्वारा: Aakash Tiwaari Aakash Tiwaari

आदरणीय आकाश जी, शाही जी का गुस्सा वाजिब है. बात फीचर होने ना फीचर होने की नहीं है.अच्छे आलेख फीचर नहीं होंगे तो अफ़सोस तो होगा ही.तब अधिक जब निम्न स्तर ब्लॉग फीचर हो जाए.आदरणीय शाही जी को जो मेल प्राप्त हुआ है उससे अवश्य ही उनकी नाराजगी कुछ कम अवश्य हुई है.मुझे ख़ुशी होगी वे फिर हम सभी का आगे भी मार्ग दर्शन करें. वे जब तक विचार करें आप बच्चन जी की विषयानुकुल कविता पढ़ें. वह उठी आंधी की नभ में छा गया सहसा अन्धेरा, धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँती घेरा, रात सा दिन हो गया,फिर रात आई और काली, लग रहा था अब न होगा इस निशा का फिर सवेरा, रात के उत्पात-भय से भीत जन-जन भीत कण-कण, किन्तु प्राची से उषा की मोहनी मुस्कान फिर-फिर, नीद का निर्माण फिर-फिर, नेह का आव्हान फिर-फिर!

के द्वारा: akraktale akraktale

मुझे मेल से जेजे ने जो संदेश भेजा है, उसे नीचे पेस्ट कर रहा हूँ, उम्मीद है कि आप लोग इससे संतुष्ट होकर पुन: अवश्य सामान्य हो जाएंगे । मैं कुछ दिनों के आराम के बाद यथोचित निर्णय लूंगा । आभार -- आदरणीय शाही जी, नमस्कार. जागरण जंक्शन के लिए सभी पाठक और लेखक एक समान हैं. जागरण जंक्शन सभी के साथ एक ही नीति अपनाता है. फीचर और टॉप ब्लॉग की श्रेणी में आने के लिए नियम और शर्तें सभी के लिए एक ही हैं. लेकिन कभी-कभी तकनीकी त्रुटि के कारण कुछ अच्छे ब्लॉग फीचर नहीं हो पाते. ऐसी स्थिति में हम छुटे हुए ब्लॉगों को टॉप ब्लॉग बना देते हैं. आपका ब्लॉग अवश्य ही फीचर श्रेणी के काबिल होगा और वह अवश्य ही फीचर होता लेकिन अकस्मात समस्या के कारण ऐसा हो ना सका जिसका मंच को बेहद अफसोस है. आपसे अनुरोध है कि आप अपने निर्णय पर पुन: विचार करें और मंच पर पूर्ववत बने रहें. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा:

प्रिय भाई आकाश जी, वाहिद जी, निशा जी, शशिभूषण जी, प्रदीप जी, राकेश जी एवं समस्त नए पुराने साथीगण, मुझे लगा कि जो हो रहा है वह शायद उचित नहीं है, इसलिये लिखना पड़ रहा है । मेरी मंशा सनसनी फ़ैलाने की नहीं बल्कि मात्र अपनी स्थिति स्पष्ट करने की थी, इसलिये लेखक रचनाकार बेवज़ह इसको तूल देकर अपने लेखन की एकाग्रता को भंग न करें, यही सोचकर टिप्पणी ब्लाक की थी, कि न तो कोई बहस होगी, न ही मामला तूल पकड़ेगा और मेरा पक्ष भी स्पष्ट हो जाएगा । लेकिन देख रहा हूँ कि आप लोग भावनाओं में बहकर जो मार्ग अपना रहे हैं, वह किसी के लिये भी हितकारी नहीं होगा । उल्टे आप जैसे भावप्रवण रचनाकारों को ठीक वैसे ही लोगों को उपदेश देते देख रहा हूँ, जिनके अस्तित्व पर ही मुझे संदेह रहा है । यानी अंडा सिखाए बच्चे को, कि बेटा चूँ-चूँ कर । मैं यही अपील करूँगा कि आपलोग इन बखेड़ों में न उलझकर जमकर लेख्नन करें, एक स्वस्थ माहौल तैयार करें ताक़ि तत्कालीन विभागीय एवं रीडर ब्लागिंग दोनों पक्ष से जुड़े लेखकों की सम्मिलित तपस्या से बनाए गए इस मंच का माहौल और बेहतर बने, खराब नहीं । ये अंडे टाइप के बदबूदार और बिके हुए या पालतू तथाकथित ब्लागर्स आपको शिक्षा देने और कल को आपको फ़ालो करने की बजाय अपने लटकों झटकों से आपको अपना फ़ालोवर न बना सकें, बस इसका ध्यान रखें । ये सब निहित स्वार्थी तत्वों के अंडज़ और पिंडज़ हैं, इन्हें दूर रखेंगे, तो सभी का विकास होगा । बाक़ी मेल करूँगा, मुझे कोई इंसाफ़ आदि की मांग नहीं करनी है, जिसके लिये आप लोग परेशान हैं । मेरे साथ नाइंसाफ़ी करने के लायक हैसियत देकर इन्हें खुदा न बनाइये । धन्यवाद ।

के द्वारा:

मैं मनोज जी की बात से बहुत हद तक सहमत हूं. शायद ही शाही जी का कोई ब्लॉग हो जो अन्य पाठक गणों की नजरों से छूटा हो. उनकी लेखनी बहुत अच्छी है और हम जैसे नवांगतुकों के लिए मार्गदर्शक भी हैं. लेकिन मात्र इस वजह से कि उनका एक ब्लॉग फीचर नहीं हो पाया, जागरण मंच और सह ब्लॉगरों को अलविदा कहने का विचार मुझे बिल्कुल सही नहीं लगता. यह भी तो हो सकता है उस ब्लॉग को फीचर ना करने का कोई कारण हों, तकनीकी खराबी या फिर और कुछ... सम्माननीय तिवारी जी, और वाहिद जी, आपकी रुसवाई तो कदापि जायज नहीं है क्योंकि आपके तो अधिकांश रचनाएं हमें फीचर सेक्शन में नजर आती हैं. आप अच्छा लिखते हैं और जागरण इसका सम्मान करता है. हम भी आप जैसे अच्छे लेखकों से सीखना चाहते हैं.  

के द्वारा: Tamanna Tamanna

मैं किसी से मंच छोड़ने के लिए नहीं कह रहा मनोज जी। यह फ़ैसला मेरा नितांत निजी फ़ैसला है। शाही जी  के साथ मेरे जैसे सम्बन्ध उसे देखते हुए मेरा यही क़दम उचित है। २२ पोस्ट और २२०१ कमेन्ट की बाबत ये कहूँगा कि मेरे ढेरों पोस्ट मैंने हाइड कर के रखे हुए हुए हैं अन्यथा आपको नज़र आता कि इतने कमेन्ट के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े हैं। शाही जी ही की तरह मैं भी कई बार भेदभाव का शिकार हो चुका हूँ। बात फ़ीचर अथवा न होने की नहीं है बल्कि इसकी है कि स्तरीय लेखन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए मगर उसे दरकिनार कर उससे कम महत्वपूर्ण किन्तु विवादित विषय को तरजीह देना कहाँ से न्यायसंगत कहा जाएगा। आप ही बताएँ मनोज जी। समय-समय पर जागरण को उसकी ग़ल्तियों की ओर ध्यान भी आकृष्ट कराया गया है मगर उनकी तरफ़ से कभी भी कोई स्पष्ट व उचित उत्तर न दे कर केवल गोलमोल जवाब में सवाल टाल दिए गए हैं। मेरा ब्लॉग फ़ीचर नहीं हो कोई बात नहीं मगर मैंने जो लिखा था उससे कमतरीन लिखे हुए को जगह देना बिलकुल भी ठीक नहीं है। धन्यवाद,

के द्वारा: वाहिद काशीवासी वाहिद काशीवासी

नमस्कार आकाश तीवारी जी, आशा है आप मुझे जानते होंगे. इस जागरण जंक्शन के मंच पर मैं भी आपकी तरह ही एक लेखक हूं,लेकिन आपसे बहुत बेकार लेखक हूं मैं. मैं आपके हर ब्लॉग और कविता रचना को हमेशा पढ़ता था. आपका ब्लॉग "जागरण जंक्शन…हाय-हाय" भी पढ़ा था मैंने. आपका यह ब्लॉग भी उसी की तरह ही लग रहा है. जनाब देखिएं यह मंच आपके और हम जैसे लेखकों की वजह से ही चलता है,. हम चाहें तो ब्ळॉगस्पोट पर भी लिख सकते हैं लेकिन वहां हमें इतनी सफाई, मान-सम्मान, जागरण का नाम और ऐसा प्लेट फॉर्म नहीं मिलेगा. आज के समय में मुझे यह वेबसाइट फेसबुक से भी अच्छी लगती हैं. हां डेसबॉर्ड में कभी-कभी दिक्कत होती है पर मंच पर भेदभाव का आरोप मैं नहीं लगा सकता. आगे कुछ नहीं कहूंगा और आपने निवेदन करूंगा कि आप राजकमल जी से सीख लें जिन्होंने इस मंच के साथ खट्टे-मिट्टी बातें होने के बाद भी लेखन त्यागा नहीं बल्कि और अधिक अग्रसर होकर काम किया.

के द्वारा:

बंधुवर सर्वप्रथम तो आपके नमस्कार, मैंने भी कल आर एन शाही जी का ब्लॉग पढ़ा और मैं आपके ब्ळॉग भी अक्सर पढ़ता हूं. मैं इस मंच के साथ बहुत दिनों से बना हुआ हूं. या यूं कहें एक लंबे समय से इस मंच का लेखक हूं. मैंने इस मंच पर परिवारों को बनते हुए देखा है. ना जानें कब यहां लोग जाने-अनजानें ही हमारे करीबी बन जाते हैं. लेकिन जिस तरह से एक परिवार में कुछ ना कुछ गड़बड़ हो ही जाती है उसी तरह से हो सकता है इस मंच में भी कुछ खामिया उतपन्न हो रही हो या की जा रही हो. पर क्या इसका मतलब यह है कि हम इस मंच को ही छोड़ दे. अगर हमारे घर में कुछ परेशानी होती है तो हम उस परेशानी को दूर करते हैं ना कि घर ही छोड़ देते हैं. और वाहिद जी आप तो इस जागरण जंक्शन मंच के अनुभवी और वरिष्ट लेखक हैं. मात्र 22 पोस्टों में ही आपके पास 2201 कमेंट है. और आप तो इस मंच पर "ब्लॉगर ऑफ द वीक" भी रह चुके हैं. फिर किस तर्ज पर आप जागरण जंक्शन पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं. देखिएं गलतियां तो इंसान से ही होती हैं. अब फीचर सेक्शन में मात्र दस ब्लॉग की जगह होती है कई बार तो खुद मेरे ब्लॉग भी फीचर नहीं होते . लेकिन कहते हैं ना कि सूरज को किसी दीपक के उजाले की जरूरत नहीं होती. उसी तरह अगर हमारी लेखनी में दम है तो किसी फीचर की हमें जरूरत नहीं आप मेरे ब्लॉग पढ़िए और खुद बताइयें कि क्या मुझे भी यह मंच छोड़ देना चाहिए? http://manojkumarsah.jagranjunction.com/

के द्वारा:

आदरणीय ब्लॉगरों.... आपकी चिंता अपनी जगह सही है... लेकिन क्या लिखने का मकसद केवल वाहवाही बटोरना या फिर फीचर होना ही है. जहां तक मैं जानती और समझती हूं शाही जी एक बहुत अच्छे रचनाकार है. यही कारण है की ज्यादातर रचनाएं फीचर भी हुई है. मुझे जहां तक समझ आता है जागरण मंच पर मौजूद सभी रचनाओं का सम्मान करता है. हां, कभी-कभार कुछ गलती हो सकती है, पर इसका अर्थ यह तो नहीं होता कि हम अपने सह ब्लॉगरों से ही किनारा कर लें. हम यहां अन्य परिपक्व ब्लॉगरों को पढ़ने आते हैं,,, ब्लॉगिंग का सीधा अर्थ अपने विचारों और मुद्दों को दूसरों के साथ बांटना है. और जागरण हमें इसके लिए बहुत अच्छा अवसर प्रदान कर रहा है. वैसे भी जेजे ने शाही जी का यह ब्लॉग फीचर किया, इसका अर्थ शायद यह है कि जेजे पक्षपात में विश्वास नहीं करता और सभी को अपनी बात रखने का मौका देना चाहता है. एक दिन में नाजाने कितनी ही पोस्टें जेजे पर आती हैं, अगर उनमें से एक बार हमारी पोस्ट फीचर होने से रह भी गई तो इसे हम नजरअंदाज करना तो नहीं कह सकतें ना.... आगे आप सब मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं...जैसा सही लगें अवश्य करें,परंतु मेरे कमेंट पर भी अवश्य ध्यान दीजिएगा..

के द्वारा: Tamanna Tamanna

के द्वारा: Aakash Tiwaari Aakash Tiwaari

नमस्कार आकाश जी ! सबसे पहले तो मैं आपसे माफी चाहूंगी । आपकी सच्चाई जाने बिना ही मैं आपसे मज़ाक कर बैठी । शर्मिंदा हूँ ... सारा लेख पढ़ने के बाद सच्चाई समझ आई । बात गंभीर है । आपके जीवन में जो भी घटा है सचमुच दुखद है । में निरुत्तर हूँ पर इतना कहना चाहूंगी की आप अपनी मोहब्बत को अपनी हिम्मत बनाइये और जो आपकी अपनी आपसे चाहती थी वो करके दिखाइये ... कई बार हमें जब अपना कोई छोडकर जाता है तो सचमुच ऐसा लगता है की बस ज़िंदगी खतम । पर नहीं ।मेरा ही एक शेर है जो में यहाँ कहना चाहती हु ....... कोई मुझे कत्ल करता किसी की क्या मजाल थी वो तो मेरा खुदा ही था जो मुझसे रूठ गया ..... तो किसी को दोष मत दीजिये । होता वही है जो भाग्य मे लिख होता है ... आपने तो बहुत कोशिश की थी पर अगर संबंध नहीं जुड़ सका  तो आप दोषी नहीं । न ही कोई और ... आप मेरी बात से शायद सहमत न हो पर मैंने भी ऐसा ही कुछ खोया है

के द्वारा: tosi tosi

के द्वारा: Rakesh Rakesh

के द्वारा:

प्रिय आकाश तिवारी जी, मैँने आपकी कहानी एक साल से पहले पढी थी और देखो ना आज 1 साल 6 महिने बाद उसी भावना के साथ पोस्ट कर रहा हूँ जैसा मुझे पहली बार पढकर FELL हुआ था। मैँ ऐसा इस लिए हो पाया है क्योकि मैने भी किसी से सच्चा प्यार किया है। यह बात तब की है तब मै स्कूल मे पढता था अब मै उन से दूर हूँ और दूर नही रह सकता। आपकी कहानी पढकर मेरा मन आप से मिलने का करता है फोन पर बात करने का करता है मैँ बाद मे और पोस्ट करूगाँ। मेरी भी हालात आपकी तरह खराब है बस आपसे मिलना चाहता हूँ। मै ठीक से सो नही पाता सोने के लिए नीँद की दवाईयाँ लेनी पडती है और पढाई करनी पडती है। PLEASE HELP ME!!! (मैँ डरा नही रहा हूँ मै तो सिर्फ और सिर्फ एक बार आपसे एक बार बात करना चाहता हूँ क्योकि मै आपको और आपने करीब पाता हूँ और शायद इस कलयुग मेँ ऐसे प्यार करने वाले ढुढने से भी न मिले.) sushant102wwe@yahoo.com

के द्वारा:

प्रिय आकाश भाई ..... नमस्कार ! जब मैं इस मंच पर नया -२ आया था तो आपसे ही मिलते जुलते विचार इस मंच पर रखे थे -उस समय मैं शायरी भी किया करता था ..... लेकिन एक तो उस समय मुझको कोई न जानने के कारण पढ़ता नहीं था और उपर से वोह लेख सोनिया गाँधी वाली इंग्लिश में था ..... फिर वैसे की कुछ विचार उपदेश सक्सेना ने रखे तो सभी ब्लागरो ने उनका इतना विरोध किया तो डर कर मुझको अपना वोह लेख डिलीट करना पड़ा ...... लेकिन जब जागरण ने यह मुद्दा उठाया है तो सभी की सोच में परिवर्तन हुआ है ..... इसलिए मैं इन बहुरूपियो का ज्यादा विश्वाश नहीं करता ..... आपकी सोच सराहनीय है और विचारधारा बिलकुल सपष्ट और सीधी है हमेशा की ही तरह ..... आपसे ऐसे ही उत्तम विचारों की आशा हम सभी को रहती है जिस पर की आप हमेशा की तरह से खरे उतरे है ..... इस लेख के लिए मुबारकबाद से भी कुछ ज्यादा हो तो वोही कहना चाहूँगा :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय आर्यन ,आशा है राखी की आत्मा प्रेम की अतुल्य बेदी चड़ने के बाद अब मुक्ति मार्ग पर हो ,                                                    मै आज के युवाओ से कहना चाहूँगा की पहले अपनी प्रथमिकताओं से भली भांति परचित हो लें ...हर बात का एक सही वक्त एक सही मुमेंट होना चाहिये थोड़ा भी इधर उधर हुआ तो कई सारी सामाजिक भावात्मक समस्याएँ आ जाती हैं उदाहरण आपके सामने है ....कुछ भी गलत सही नहीं होता बस आप स्वयं के व्यक्तित्व को पहचाने ...प्राथमिकताओं को तौले फिर जीवन के प्रति कोई परिभाषा गढें....स्वयं की हत्या भावनाओ की हत्या से कही अधिक जटिल है लेकिन सुगम शब्द आज के परिवेश में बहुत प्रासंगिक भी नहीं ....व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है की माँ जीवन का सबसे अधिक मार्मिक पक्ष होता है जब हम उसके जाने के बाद लिये इस दुनिया को नहीं छोड़ते तो किसी तीजे के लिये जीवन त्यागने का निर्णय मै सही नहीं मानता ...हम एक बार उसे अनंत पीड़ा पहुंचा कर दुनिया में आते है दोबारा ऐसा करने का हमें कोई हक नहीं है .........................

के द्वारा:

नमस्कार भाई जान उम्मीद करता हूँ आप खैरीयत से होंगे बाबा के आन्दोलन का मक्सद व्यक्त्तिगत नहीं था इसलिए जो लोग कहते हैं के बाबा का आन्दोलन फेल हो गया मैं उन से पुछ्ना चाहता हूँ के आन्दोलन के सफल हो जाने पर क्या सारा काला धन बाबा को मिल जाता या देश के आम जनता को लाभ होता। सत्याग्रह धैर्यपूर्वक किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा न कर हमने अपने पैर पर कुलहारी मार ली। मेरे विचार से सरकार कि गलती का फायादा हमें लेना चाहिए था बाबा कि यदि गिरफतारी हो जाती तो आज देश का नजारा कुछ और होता। रही बात बाबा के मारने वाली बात तो मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ क्योंकि इतनी भीड़ के सामने यदि बाबा कि खरोंच भी आ जाती तो कयामत आ जाता। इतनी बडी बेवकूफी सरकार कर हि नही सकती थी। अभी भी कुछ नहि बिगड़ा है यदि हम सब अपने निज स्वार्थ को त्याग कर साथ हो जाए तो हम जरुर सफल हो सकते हैं। क्योंकि एकता में बडा बल होता है। क्या बाबा रामदेव के अलावा किसी के पीछे इतना जनसमर्थन जुट सकता है शायद नहीं तो निर्विवाद नेता मानने में आखिर दिक्कत किस बात की है। भगवा वस्त्र वाला है इसलिए बडी शर्म की बात है हमें भगवा रंग तो नजर आता हैं लेकिन दिल में छुपी भारत मां की मुहब्बत नजर नही आता। जहां तक मैं जानता हूँ साधु पैन्ट शर्ट नहीं पहनते। बाबा कि कमयाबी, दौलत तो नजर आता है लेकिन उनकी भारतीयता नजर नही आती। वैसे तो बाबा से ज्यादा दौलतमन्द लोग हैं और उनकी दौलत कैसी है ये जगजाहिर है।

के द्वारा:

आकाश तिवारी जी नमस्ते, आप जैसे भी पुरुष हैं ; इस दुनिया में - जानकर बहुत सुकून मिला -सुकून इस बात का सबसे ज्यादा है ; आप और आप जैसे यदि और लोग भी हैं.. तो.. आगे आकर ऐसी आवाज देंगें ; अर्थात 'बलात्कार" के खिलाफ एक सख्त आन्दोलन करेंगे - तभी अपने देश में - ऐसा सख्त कानून बन सकेगा ( जैसा कि आपने अपने लेख में चर्चित किया है ) - फिर हर व्यक्ति "बलात्कार " की सजा के " खौफ़' से भयभीत रहेगा , और कभी स्वप्न में भी " बलात्कार " करने की नहीं सोचेगा . आप जैसे पुरुष ...क्या ..महापुरुष ही साबित होंगे ..यदि ऐसा सफल प्रयास कर सकें . आपके इस सफलतम प्रयास से -आप अपनी, तथा सभी की बेटियों, बहनों ,पत्नी और मां की - तन- मन से सुरक्षित कर पायेंगें - जिससे कि आप सदा सभी कि दुवाओं / आशीषों से सुशोभित होते रहेंगे और आपका यश चारों दिशाओं में फैलेगा . बहुत - बहुत धन्यवाद. मीनाक्षी श्रीवास्तव

के द्वारा:

प्रिय राकेश भाई बहुत ही गंभीर मन को छू लेने वाला ये आलेख आप का इसका जबाब देना बहुत मुश्किल काम है हालत ही बयां करते हैं जबाब को कौन सी परिस्थिति में क्या होता है ये समाज है इस में लाज है मान है मर्यादा है हर घर परिवार की कुछ अपनी इज्जत अलग मान है सब के ख्वाब कुछ अलग होते हैं सब अपने बेटे बेटियों के लिए कुछ अलग सोच रखते हैं और चाहते हैं की उनकी संतान कुछ उन्हें भी माने जिसके लिए वे इतने दिन मरे हैं जियें हैं पल भर में सब मर्यादा धुल धूसरित न कर दे कहीं कहीं माँ बाप दिल को मन भी लेते हैं तो ये कडवा समाज उन्हें जीने नहीं देता बेटी भाग गयी उनके साथ कह देता है मुंह काला हो जाता है बहुत कुछ है आकाश जी फिर भी ये लेख प्रेम की कहानी बहुत ही प्यारे और संजीदा ढंग से वर्णित कर सका -प्यार जुर्म नहीं इसे मानना चाहिए हाँ कोशिश हो की दोनों पक्ष सहमत हो जाएँ प्यार ये प्यार आजीवन बना रहे मुझे आपसब से जवाब चाहिए………….हिन्दुस्तान में सच्चे प्यार को राधा कृष्ण से जोडकर नहीं बल्कि अपराधियों की तरह देखा जाता है…..क्या हमारा प्यार गलत था…क्या हम गलत थे अगर प्यार करना गलत है तो उखाड़ फेको राधा-कृष्ण की मूर्तियों को…….समाज का दोगला चरित्र है ये…..एक तरफ राधा कृष्ण को एक साथ पुजते है और दूसरी तरफ दो दिलों को जुदा करते है… शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा:

आकाश जी नमस्कार -हंसा हंसा आप ने सुंदर व्यंग्य की चटनी चटा दी -लगता है आप को भेजना पड़ेगा संसद में जहाँ जा एक दिन आप संसद को संबोधित करेंगे और उन्हें सम्मोहित कर अपना कानून बदलवाने में सक्षम होंगे ताकि ये देश अपने नाम के लिए सब नियम नीति की धज्जी न उडा दे -पुराने घिसे पिटे कानून में तबदीली करे और आदमी की जान रहते रहते उसे निर्णय और न्याय दिखा सके - भाई ये भारत है यहाँ पर मुझे फांसी पर तो लटकाया नहीं जाएगा यहाँ बहुत सी पार्टिया है कोई न कोई तो मेरे पक्ष लेकर लडेगा ही..ऐसे ही कुछ साल बीत जायेंगे जहा मै चूरन और समोसे की चटनी नहीं खरीद सकता था वही मुझे करोडो में पाला जायेगा यही होता रहा दो टके की जांच के लिए करोड़ों बहा देना और हमारी जनता को भूखे मार देना -क्या पागलपन है शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा:

प्रिय आकाश भैया प्रणाम अपने मेरा ब्लॉग पढ़ा और अपने स्वर्णिम सुझाव से अवगत कराया भैया वोइसे भी आज अगर आपकी और ......दीदी की प्रेरणा ना होती तो सायद ही मै कुछ लिख पाता आपकी वो एक आत्मकथा ने मेरी जीवन शैली को बदल कर रख दिया इस बदलाव के लिए आपका सहृदय धन्यवाद् और आभार भैया मै अपने पेज से आपलोगों को रेपली नहीं कर पा रहा कारन की पहला तो वहाँ हिंदी आप्शन नहीं मिल रहा और दूसरा अगर किसी तरह लिख भी देता हु तो सैंड करते समय invalid कोड शो करता है आप से मदद की आशा है भैया और अप्प कैसे है भैया ?अप्पके no.सायद बंद है सो आपका हाल चाल भी नहीं जान पा रहा हूँ खैर आप अपना धयान रखियेगा धन्यावाद आपका विनीत सुप्रिय

के द्वारा: supriyo supriyo

प्रिय आकाश भैया प्रणाम आपका नया पोस्ट पाकर बहुत ख़ुशी हुई और आपके ब्लॉग में अपना नाम देखकर मै सायद निरुत्तर सा हो गया हु की मुझे अप्पने इतना लायक समझा वरना हम तो डाली से टूटे पत्ते है  और भैया दुनिया मे अपनाऔर गैर कोय नही होता हम जिस लडकी से विवाह करते है उससे  कोय रक्त संबंध नही होता पर वो हमारी सबसे ज्यादा केयर करती है  क्योकि "in heart relation there is no logic only magic"so in my opinion heart relation is so great then blood relation और भैया मेरे नाम के साथ श्री और जी शब्द ना लगाइये मै आपका भाई हूॉ ऩा  और ना आप सा महान हू और भैया मैनाम तो नही लूगां पर मेरा पहला व्लाग दो देवात्मा को समर्पित होगा  धन्यवाद भैया अपना ख्याल ऱखिेगा और नया पोस्ट पाने की आशा के साथ शुभ रात्री आपका विनित सुप्रिय

के द्वारा:

प्रिय आकाश भैया प्रणाम आपका नया पोस्ट पाकर बहुत ख़ुशी हुई और आपके ब्लॉग में अपना नाम देखकर मै सायद निरुत्तर सा हो गया हु की मुझे अप्पने इतना लायक समझा वरना हम तो डाली से टूटे पत्ते है  और भैया दुनिया मे अपनाऔर गैर कोय नही होता हम जिस लडकी से विवाह करते है उससे कोय रक्त संबंध नही होता पर वो हमारी सबसे ज्यादा केयर करती है क्योकि \\"in heart relation there is no logic only magic\\"so in my opinion heart relation is so great then blood relation और भैया मेरे नाम के साथ श्री और जी शब्द ना लगाइये मै आपका भाई हूॉ ऩा और ना आप सा महान हू और भैया मैनाम तो नही लूगां पर मेरा पहला व्लाग दो देवात्मा को समर्पित होगा धन्यवाद भैया अपना ख्याल ऱखिेगा और नया पोस्ट पाने की आशा के साथ शुभ रात्री आपका विनित सुप्रिय

के द्वारा:

अंत में मै सिर्फ इतना कहूँगा होली का त्यौहार आपसी द्वेष को,पुरानी दुश्मनी को मिटा कर एक दुसरे को प्रेम से गले लगाने का त्यौहार है…पूरे साल हमारे द्वारा बोले गए कडवे शब्दों को मिठास में बदलने का त्यौहार है…इस त्यौहार की मिठास को बनाये रख्खे…इस त्यौहार पर गुझिया और ठंडई का मजा लेना चाहिए न की शराब का….होली पर शाम को एक दुसरे के यहाँ जाकर गले मिलना चाहिए…होली के दिन हमारे द्वारा छोटा सा प्यार भरा प्रयास समाज को बहुत ही खुशहाल बना सकता है….इसी उम्मीद के साथ ….. प्रिय आकाश जी कितनी सुन्दर पिचकारी , कितने शोख रंग , व सुकून भरी फुहारों की शीतलता, मन की क्यारी जैसे खिल उठी | होली पर ये भावनाए ये विचार बाट कर हम सब इस त्यौहार का मजा दुगुना कर सकते है | बधाई

के द्वारा:

श्री राजकमल जी, पहली बात तो आप ये कहना बंद कर दीजिये की मैंने आप पर कोई एहसान किया है..दूसरी बात मैंने आप का लेख पढ़ते ही तुरंत एक पोस्ट ब्लॉग पर डाली ...आप उस पोस्ट को देखेंगे तो पायेंगे की बहुत ही कम प्रतिक्रिया आई है ऐसा क्यों ...मै एक बात बहुत ही स्पष्ट कह देना चाहता हूँ यही है हिन्दुस्तान जब वक्त आता है तो साथ में कोई नहीं दिखता..ऐसे ही किसी विषय को लेकर क्रान्ति नहीं हो सकती...सिर्फ लिख देना ही बड़ा नहीं होता कुछ कर दिखाना चाहिए,..मै एक पत्रकार का बेटा हूँ मेरे पिता कभी किसी के दबाव में नहीं आये और मै खुद कभी किसी के दबाव में नहीं आना चाहता हा मगर सच्चाई के लिए....अब यहाँ मै आपको सही मानू या फिर जे.जे. को मुझे यही समझ में नहीं आ रहा.. इसलिए मै इस विषय को यही खत्म करना चाहता हूँ और आपसे भी यही निवेदन करूँगा .....आगे की देखिये...आप अगर सही है तो मुझे नहीं लगता की आपको स्पष्टीकरण देना चाहिए..मुझे कहीं-कहीं पर आपके जवाब बहुत झल्लाहट वाले दिखे.....एक हास्य/व्यंग के रचनाकार को तो इतना गुस्सा आना ही नहीं चाहिए.... इसलिए मै पुनः आपसे निवेदन करता हूँ की इस विषय पर प्रतिक्रिया का दौर खत्म कीजिये...जिसको जो कहना है कहने दीजिये... आकाश तिवारी

के द्वारा: Aakash Tiwaari Aakash Tiwaari

प्रिय आकाश भाई ......नमस्कार ! आपने मेरे साथ दिया उसके लिए मैं आपका एहसानमंद हूँ ..... शायद मेरे अकेले की आवाज सुनी भी ना जाती ..... लेकिन हमेशा की ही तरह आपका साथ और आपकी मेहनत रंग ले आई ..... आज सपष्ट हो गया की जागरण जंक्शन की नज़र में आपकी कितनी अहमियत है ...... और हम लोग तो कठपुतलिया मात्र है , यह बात इसी से साफ़ हो जाती है की अपनी एक हफ्ते बाद वाली नीति को बदलते हुए , मेरे उस लेख को जागरण ने तीसरे दिन ही तप टेन में डाल दिया ताकि मैं उसको डिलीट ना कर सकूं और उनका पक्ष सारे जान ले ...... जब वोह हमारी कई बाते मान लेते है तो मैंने भी उनकी इसी मानसिकता का पहले से ही अनुमान लगाए हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी बात पहुंचाने के मकसद से अपने ब्लाग पर उनको दिया हुआ जवाब आपके ब्लाग पर भी पेस्ट किया था ....... खैर मैं उनके प्रयास को सकारात्मक रूप में देखता हूँ की अब शायद ही किसी ब्लोगर को मेरे जैसी समस्या से दो चार होना पड़े ..... लेकिन कुछेक ब्लागर भाईयों के मन में ही नहीं बल्कि कलम से भी जो शंका झलकती है उससे मन दुखी हो करके ना चाहते हुए भी यह कामना करने लगता है की ऐसी समस्या दो चार ब्लागरो को पेश आ ही जाए , शायद तभी उनको यकीन आएगा और इसकी गंभीरता का यकीन होगा ..... शायद हम लोग जल्दबाजी कर गए , अगर इंतज़ार करते तो उसकी असली मंशा का पता चल जाता की आखिर वोह क्या चाहता है .... लेकिन दूसरी तरफ यह सोच भी उभरती है की ऐसे लोगों की सोच सिथर और परिपक्व नहीं होती ,इनका कोई भरौसा नहीं होता की कब क्या कर दे , इसलिए इनको ऐसा मौका ना देकर अच्छा ही किया ..... अंत में यही कहूँगा की मझे नाज़ है आप जैसे दोस्त पर , काश की कोई लड़की भी मेरी ही तरह आपसे ऐसा कह दे , इसी कामना के साथ आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

जागरण जंक्शन ब्लॉग के आदरणीय सदस्यगण .....सादर अभिवादन ! जैसी की आशा थी , आपका जवाब मिला , जिस प्रकार आपके लिए इस मंच की प्रतिष्ठा मायने रखती है , उसी प्रकार हम ब्लागरो के लिए भी रखती है ..... जब भी मुझको या किसी और को कोई भी दिक्कत होगी तो वोह अपनी समस्या को ब्यान करेगा , उसके तरीके अलग -२ हो सकते है हर किसी की अपनी -२ समझ के अनुसार ...... हममे से ज्यादातर का यही सोचना और मानना है की फीड बैक पर हमारी कोई सुनवाई नही होती , इसलिए ब्लाग लिखने का सहारा लिया जाता है ...... हम यह भलीभांति जानते है की हरेक तरह की सक्रियता पर आपकी पैनी नजर रहती है ..... लेकिन हम लोग तो आपके द्वारा दिए गए जवाब को ही इस बात का आधार और पैमाना मानते है की हमारी बात आप तक पहुँच गई .... मैंने जो अपनी बात समस्या के रूप में आपके और सभी ब्लागरो के सामने रखी , मुझ पर विश्वाश और स्नेह के नाते दूसरे ब्लागरो ने उसको सच मान कर विश्वाश किया ..... मैं नही समझता की कोई किसी के विश्वाश का इस तरह बेजा इस्तेमाल करेगा ...... आपने जो अपनी तहकीकात में मेरी उस शिकायत को निराधार पाया है , उस पर मै इस मंच की प्रतिष्ठा और दूसरे ब्लागरो के विश्वाश और इस मंच पर उनके भविष्य के मद्देनजर विश्वाश करने पर मजबूर हूँ ..... सच्चाई जो भी रही हो , उसको आप और मैं जानते ही है ...... इसके साथ -२ हम सभी में यह विश्वाश पैदा हुआ है की आगे हम में से किसी के भी साथ कोई भी ऐसी या वैसी समस्या पैदा नही होगी ....... हमारे द्वारा लिखे जाने वाले ब्लाग अब हमारी नही बल्कि इस मंच और समाज की अमानत है .... यह सच है की उस समय मैं अपने ब्लाग को डिलीट करना चाहता था , लेकिन अब नही .....उसके लिए मैंने डैशबोर्ड में डिलीट ब्लाग का इस्तेमाल किया था .... जहाँ पर की मुझको यह लिखा हुआ मिला था की अब मैं भविष्य में दुबारा कभी भी इसी नाम से ब्लागिंग नही कर सकूंगा ...... ओके क्लिक करने पर इमेल द्वारा सूचित करने की लाइन पढ़ने को मिली थी ...... यदि जीमेल द्वारा मुझको आई.पी. एड्रेस सहित मेरा खाता किसी दूसरे के द्वारा देखे जाने की मेल , मेरे द्वारा गलती से डिलीट नहीं हुई होती तो आपको भी तहकीकात में सहूलियत होती ...... आपके द्वारा समस्या के निवारण के लिए किये गए प्रयासों औए भविष्य में उनकी पुनरावर्ती रोकने के लिए किये गए प्रयासों की मैं सराहना करता हूँ और आपका आभार प्रकट करता हूँ ...... इसके इलावा मुझे और कुछ नही है कहना ...... राजकमल शर्मा

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

श्री राजकमल जी, किस बात का कर्जदार...मैंने तो वही किया जो मेरा फर्ज था.एक जिम्मेदार नागरिक और एक जिम्मेदार ब्लोगर के नाते मुझे गलत चीजों के लिए आवाज उठानी चाहिए सो मैंने किया....और जब बात अपनों की हो तो फिर मैदान में खुलकर तो आना ही पड़ता है.....श्री राजकमल भाई अगर जागरण की तरफ से अलग से या फिर मेरे इस पोस्ट पर या फिर आपके पोस्ट पर इस समस्या के सम्बन्ध में अगर कोई जवाब नहीं आया तो मै जागरण जंक्शन पर ब्लोगिंग करना छोड़ दूंगा...क्योंकि हमारी गलतियों पर इनकी नजर तुरंत पड़ती है....मगर जब ऐसा कुछ गलत हुआ है तो दो दिन बीत गए कोई स्पस्टीकरण नहीं आया..इस गैर जिम्मेदाराना माहौल में मै तो नहीं रह सकता... आपका आकाश तिवारी

के द्वारा: Aakash Tiwaari Aakash Tiwaari

प्रिय आकाश भाई .....सस्नेह नमस्कार ! आपने और मैंने बाकि के ब्लोगर साथियो के साथ इस मंच पर ना जाने कितने ही मुश्किल हालातों का सामना कियाथा , तब भी हमने डट कर नापाक इरादे वाले नीच और नराधम लोगों का सामना किया था .....पहले दुश्मन सामने था लेकिन इस बार वोह मेरे खुद के ही भीतर कहीं समा गया था .... लेकिन सभी पासवर्ड बदल लिए जाने के कारण अब शायद उसकी पहुँच मेरे तक ना रह गई हो ..... आपने पहले भी कई बार अपना रोष लेख लिख के जतलाया है और मेरा साथ दिया है ..... इतना बवाल खड़ा हो गया + इतना हो हल्ला मच गया ..... यूँ कहिये की इस मंच पर एक ऐसी आंधी आई की जिसको आपके साथ और सहयोग ने बवंडर में बदल दिया ..... यदि अभी भी हम सोचे की जागरण चुप है तो यह हमारी गलतफहमी होगी .... हमारे इन सामूहिक प्रयासों के फलस्वरूप अब उनको इस मंच पर अति उन्नत तकनीक इंस्टाल करनी ही होगी .....इसलिए मुझको नहीं लगता की अब भविष्य में किसी भी ब्लोगर के साथ ऐसी किसी भी प्रकार की समस्या आएगी ....यदि फिर भी किसी समस्या से दो चार होना पड़ा तो हम सभी के लिए विकल्प खुले है ...... आप के द्वारा दिए गए इस अनमोल सहयोग से मैं अभिभूत हूँ ....आपने मुझको अपना कर्जदार बना लिया है .....मैं उम्मीद करता हूँ की मेरी अगली किसी पोस्ट पर पहला कमेन्ट आपका ही होगा .... आपका दिल की सभी गहराइयों से आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma