बेवफ़ाई

जब दिल टूटता है

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सच्चा वैलेंटाइन ***आत्मकथा*** “Valentine Contest”

Posted On: 14 Feb, 2011 Others में

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इस तन्हा ज़िन्दगी में सब कुछ बेगाना सा था,
इक तेरा नाम था जो कुछ जाना पहचाना सा था…

क्लास के दरवाजे के गेट के परदे को हटाते हुए जैसे ही मै अन्दर घुसा सबने मुझे पलटते हुए बहुत गौर से देखा उस क्लास का शायद मै ही सबसे स्मार्ट लड़का था…………मैंने भी सबको देखा मगर न जाने क्यों तुमपर मेरी नज़र जाकर टिक गयी,..दिल में एक अजीब लहर दौड़ गयी….मेरे दिल,शरीर मन को न जाने क्या हो गया था कुछ क्षण के लिए मै वही खड़ा रह गया फिर…………………………मै सोचने लगा की जिसको मैंने पहली बार देखा है वो मुझे अपना-अपना सा क्यों लग रहा है…

आर्यन त्रिपाठी.. राखी त्रिपाठी हम दोनों ही एक कोचिंग में 9th क्लास में  साथ-साथ पढ़ते थे….हम दोनों ही एक दुसरे को बहुत प्यार करते थे मगर दोनों ही एक दुसरे को बोलने से डरते था….हम दोनों ही पढने में बहुत अच्छे थे…मेरी अंग्रेजी बहुत कमजोर थी और इसलिए मै क्लास में राखी के सामने शर्मिंदा होने से बचने और राखी की तरह अंग्रेजी बोलने के लिए दिन रात अंग्रेजी पढने लगा और डेढ़ महीने में ही मैंने अपनी क्लास में अंग्रेजी के टेस्ट में सबको पछाड़ दिया…मेरे घर वाले मेरी अंग्रेजी में हुए इस परिवर्तन से बहुत प्रभावित थे….मै हर पल राखी को देखने की कोशिश करता था…एक दिन मैंने बहुत हिम्मत करके राखी की कापी में लवलेटर रख दिया…….

उस दिन मै बहुत घबराया हुआ था…दो दिनों तक राखी ने मुझे कोई भी जवाब नहीं दिया था मेरी बेचैनी बहुत बढ़ गयी थी…अगले दिन….राखी ने भी अपने प्यार का इजहार कर दिया था…

मेरे आर्यन,

कितना लिखूं…और क्या लिखूं….अपनी ख़ुशी को कैसे दिखाऊँ, अपनी दिल की बात जो इतने दिनों से दिल में ही मैंने दबा के रख्खी थी आज मै सारी बाते तुमसे कह देना चाहती हूँ…आर्यन मै तुमको बहुत-बहुत-बहुत प्यार करती हूँ,कितना प्यार करती हूँ इसका अंदाजा जब मुझको खुद नहीं है तो तुमको क्या होगा…जब तुम पहली बार क्लास के अन्दर आये थे तो तुमको देखते ही ऐसा लगा की तुमको मैंने पहले भी कभी देखा है,या यूँ कहूँ की तुम्हारा मेरा कभी साथ रहा है, हम दोनों का पुराना रिश्ता है…एक शब्द में कहूं तो तुम मुझे पराये नहीं लगे..क्लास में तुम्हारे मुह से निकली एक-एक बात  हर पल मेरे कानों में गूंजती रहती थी,घर पर मन भी नहीं लगता था बस तुमको ही देखने की तुम्हारी बाते सुनने की और तुम्हारे साथ रहने की इच्छा होती थी…तुमको तो याद होगा जब मै दो दिन क्लास नहीं आई थी,वो दो दिन मेरे लिए एक महीने से भी बड़ा लगने लगा था…उस दिन मैंने सोचा था की तुमसे अपने प्यार का अब इजहार कर दूँगी मगर फिर दिल में एक डर की जैसे मै तुमको प्यार करती हूँ क्या तुम भी करते होगे,अगर तुमने मेरे लेटर को फाड़ दिया,या किसी को बता दिया तो मेरा क्या होगा,मै हूँ तो एक लड़की ही न चाह कर भी इन दो महीनो में तुमसे कुछ भी न कह पायी कभी-कभी कुछ न कह पाने से बहुत दुःख होता था और मै घर पर बहुत रोती थी और सोचती थी की जिससे कभी कोई प्यार की बात नहीं हुई आखिर मै उससे इतना प्यार क्यों करती हूँ अगर मेरा प्यार इकतरफा हुआ तो मेरा क्या होगा..आज जब तुमने मुझसे अपने दिल की बात कही तो मानो ऐसा लगा कोई जख्म जो महीनों से दर्द दे रहे थे वो अचानक अच्छे हो गए…मै तुमसे कैसे कहूं तमने मुझे अपना कर मुझे क्या दिया है..आर्यन I LOVE YOU ….मै तुमको बहुत प्यार करती हूँ…मैंने तुम्हारे लेटर का जवाब देने में देरी इसलिए की क्योकि मुझे तुम्हारे प्यार की हकीकत देखना था.आर्यन कभी मुझे छोड़ना मत वरना तुम्हारी राखी मर जायेगी…..
बाकी बाते अगले ख़त में…

तुम्हारी अपनी
राखी

प्यार की शुरुआत में ही एक दुसरे के लिए ऐसे जज्बात…शायद ही ऐसे जज्बात सभी जगहों पर देखने को मिलते हो…शायद यही प्यार है… प्यार न तो सूरत देखता है न शीरत…प्यार किसी के दिल में किसी के लिए जबरदस्ती पैदा भी नहीं किया जा सकता….

अब हम दोनों बहुत ख़ुशी ख़ुशी कोचिंग पढने लगे ..रोज लवलेटर का आदान प्रदान होने लगा….मै कभी भी राखी की खूबसूरती को नहीं निहारता था…मेरी  निगाहें राखी की आँखों के इलावा उसके किसी भी अंग को नहीं देखती थी…राखी और मै हफ्ते में एक बार जरूर मिलते थे मगर कभी भी मैंने राखी को गलत भावना से छुआ भी नहीं था….हम दोनों का प्यार और पढ़ाई बदस्तूर जारी रहा….9th ,10th …

एक दिन राखी के पडोसी ने राखी को मेरे साथ देख लिया और फिर शुरू होती है हमारे प्यार की बदनसीबी….राखी के पापा और मम्मी ने उसको खूब मारा और कमरे में बंद कर दिया …और अगले दिन कोचिंग आकर राखी के पापा ने मुझको भी दो थप्पड़ मारा…..मैने राखी के पापा को साफ़-साफ़ कह दिया की मै राखी को गंदी नजरों से प्यार नहीं करता…बल्कि मै राखी से सच्चा प्यार करता हूँ…पढाई भी कर रहा हूँ कुछ बनते ही राखी से शादी कर लूँगा…..मगर राखी के पापा ने मेरी एक न सुनी…मुझको कोचिंग से निकाल दिया गया…मै राखी से मिलने के लिए बहुत तड़पने लगा…उधर राखी ने कई दिनों तक कुछ भी नहीं खाया बंद कमरे में चिल्ला-चिल्ला के घर वालों को बोलती रही की मैंने कुछ भी गलत नहीं किया मै आर्यन से 2 सालों से प्यार करती हूँ…आर्यन ने मुझे आज तक छुआ भी नहीं…पढ़ाई भी हम दोनों अच्छे से कर रहे है…आर्यन ने कहा है वो नौकरी करते ही अपने घर वालों के साथ मेरा रिश्ता माँगने आएगा…मुझे बाहर निकालो मुझे आर्यन से मिलना है….अगर मै आर्यन से न मिली तो मै मर जाउंगी…मगर राखी के घर वाले राखी की एक भी नहीं सुन रहे थे…इधर मैंने अपने मम्मी पापा को बहुत अच्छे से समझाया…मेरे पापा मेरी बात मानकर मुझको लेकर राखी के घर जाते है और वहा पर राखी के ममी-पापा से मिलते है और कहते है…

त्रिपाठी जी आपको भी पता है और मुझे भी पता है की राखी और आर्यन दोनों एक दुसरे को बहुत प्यार करते है…दोनों पढने लिखने में भी अच्छे है मुझे लगता है की दोनों की सगाई कर दिया जाए और आर्यन के नौकरी करते ही दोनों की शादी कर देते है….मै भी पंडित हूँ…..और आप भी…दोनों लोग किसी भी स्तर पर किसी से कम नहीं है……आप क्या सोचते है…

राखी के पापा ने कहा…भाड़ में जाएँ आप और आपकी सलाह…राखी की हिम्मत कैसे हुई प्यार करने की…ये वहीँ शादी करेगी जहा मै चाहूँगा…अपने रूढ़िवादी विचारों पे अडिग रहते हुए राखी के पापा ने मुझे और मेरे पापा को घर से निकाल दिया…हम दोनों की हालत बहुत खराब होने लगी मगर फिर धीरे -धीरे घर वालों का साथ पाकर हम दोनों फिर से घर से निकलने लगे…राखी के पापा राखी के लिए रिश्ता खोजने लगे…जब बहुत दिनों बाद हम मिलते है तो दोनों लिपट कर बहुत रोते है….

हम दोनों शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो जाते है पढ़ाई का भी बहुत नुकसान होता है….राखी मेरे आँखों से निकलते हुए आंसुओं को पोंछते हुए खुद बहुत रोती है…मै राखी से कहता हूँ…जानू हमने क्या गलत किया है जो हमारे घर वाले हमारे साथ ऐसा कर रहे है…..मेरे घर वाले तो मान भी गए मगर तुम्हारे पापा ने तो मेरे पापा की बहुत बेइज्जती की वो अब कभी तुम्हारे घर नहीं जायेंगे…मै राखी से भाग चलने के लिए कहता हूँ….मगर राखी मुझसे कहती है की… हम गलत नहीं है जो भाग के शादी करे… मै तुमसे बिना मिले रह नहीं पाती…आज जब वापस घर जाउंगी तो फिर जल्दी वापस नहीं मिल पाउंगी अपन ख्याल रखना…कभी कुछ उल्टा सीधा मत करना अभी हम-दोनों को पूरी जिंदगी साथ देना है..देखना मै तुमसे जरूर मिलूंगी…..बहुत जल्द मै तुमसे हमेशा हमेशा के लिए मिलूंगी…आज राखी की बातों में मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ…

हम दोनों अपने अपने घर वापस चले आते है…मै राखी की यादों में कापी में कुछ शब्दों को लिखने लगता है…ये सब घटनाए मुझे कविता लिखने की प्रेरणा देने लगी…मै टूटी फूटी कवितायें लिखने लगता हूँ…मेरी हालत मेरे घर वालों को बर्दास्त नहीं होती मगर बेचारे करते भी तो क्या करते…बहुत समझाते थे मगर मै हमेशा चुप रहने लगा…इधर राखी अपने परिवार वालों को बहुत समझाती है….राखी अपनी माँ से कहती है..मम्मी मेरी शादी तो आप लोगों को करनी ही है,तो फिर आर्यन में क्या बुराई है अपने ही जात बिरादर का अच्छे घर का लड़का है और क्या चाहिए आप लोगों को…..अगर आपने अब मेरी बात नहीं मानी तो मै जान दे दूंगी…..राखी की बातों को उसके घर वाले अनसुनी कर देते..

एक दिन मुझे राखी का लेटर मिलता है

मेरे जानू मेरे सबकुछ मेरे अपने आर्यन

मुझे इस बात का बहुत दुःख है की मेरे घर वालों ने मेरी एक भी बात नहीं मानी….मैंने उनसे हर तरह की बात कर लिया…..मुझे ऐसा कोई कारण नहीं दिखता की वो मेरी शादी तुमसे न कर पाए..मेरे रिश्तेदारों द्वारा किये गए परिहास को याद कर मेरे माँ बाप तुमसे मेरी शादी नहीं करना चाहते..जबकि तुम भी पंडित हो और मै भी…हमारी तुम्हारी शादी तो मेरे घर वालों को हंसी खुसी कर देना चाहिए…मगर मेरे घर वालों ने अपनी ही जिद्द पकड़ी हुई है…मैंने जिंदगी में तुमसे कभी दूर जाने की कल्पना भी नहीं की थी मगर इधर तीन महीनों में मै इकदम टूट गयी हो मुझे मेरे घर वालो ने तुमसे दूर रखकर अच्छा नहीं किया…मेरा जिस्म मेरे जान से दूर कैसे रह सकता है….मै भाग के शादी करके अपने प्यार को बदनाम भी नहीं कर सकती शायद मेरे इस कदम से मेरे पापा अपनी जान दे दे..मुझे पता है की तुमको भी बहुत दुःख है…..मगर तुमको मेरा साथ देना ही होगा …जानू…तुम एक दिन इतने कामयाब इंसान बनना की मेरे घर वाले तुमसे बात करने को और मिलने को तरसें……जानू मै तुमको बहुत याद कर रही हूँ… मुझे हमेशा प्यार करना अब बस मै ज्यादा नहीं लिख पा रही हूँ आंसुओं के कारण कुछ दिख नहीं रहा है….जानू कल मुझे देखने वाले आ रहे है …राखी को देखने का अधिकार केवल उसके आर्यन को है…अब मै जिन्दा नहीं रह सकती…मुझे पता है मेरे मरने के बाद तुम भी कुछ करोगे मगर मैंने वादा दिया है कुछ बनकर दिखाना अगर तुमने मरने की कोशिश भी की तो तुम्हारी जानू तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेगी………
मै बहुत तकलीफ में हूँ जानू……ये लेटर जब तुमको मिलेगा तबतक मै इस दुनिया से बहुत दूर चली जाउंगी……
अपना ख्याल रखना

सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी
राखी

लेटर पाते ही मै दौड़ते हुए राखी के मुहल्ले में पहुँचता हूँ…वहा चीख पुकार मची रहती है….और राखी के घर के सामने राखी का जनाजा रख्खा रहता है …..मै बहुत चिल्लाता हूँ…मै राखी को आखिरी बार देखना चाहता था मगर कोई मुझे उसके पास नहीं जाने देता…
मै बेहोस हो जाता हूँ…होस आने पर खुद को हास्पिटल में पाता हूँ और मै बहुत रोता है, सब से राखी को वापस लाने के लिए बोलता हूँ…”जानू लौट आओ न ” जानू तुमने अच्छा नहीं किया जन्मो साथ रहने का वादा किया था लेकिन तुमने बेवफाई की है…तुम मुझे अकेला छोड़ के चली गयी तुम धोखेबाज हो…जानू लौट आओ न………

मेरे पास दो लेटर रख्खा रहता है …एक राखी का और एक अपनी कम पढ़ी लिखी माँ द्वारा टूटे फूटे शब्दों में लिखा हुआ…

राखी के लेटर में राखी ने आर्यन से वादा लिया था की वो कुछ कर दिखाएगा…

माँ ने लिखा था…

बेटा हमने हमेशा वो किया जो तुमने चाहा राखी ने जो किया उसमे हमारा कोई कसूर नहीं था…अगर तुमने अपने आप को कोई नुकसान पहुंचाया तो मै भी मर जाउंगी…इसलिए तुम अब राखी का ख़्वाब पूरा करना बेटा…मैंने एक शर्त पर कुछ न करने की बात मानी वो थी…मै कभी शादी नहीं करूँगा …”

मै उन रूढ़िवादियों से पूछना चाहता हूँ क्या गलती की थी राखी ने..क्या प्यार करना पाप है..राखी और मै  सभी दृष्टिकोण से सामान थे फिर क्यों माँ बाप अपनी जिद्द पर अड़े रहे क्या मिला उन्हें …..क्या मेरा शादी न करने का फैसला गलत है…जब मेरी जानू मेरे लिए अपनी जान दे सकती है तो क्या मै उसके लिए इतना छोटा बलिदान भी नहीं दे सकता…क्या हमारा प्यार सच्चा नहीं था…आज जब इंसान शरीर पर छोटा सा घाव बर्दास्त नहीं कर सकता राखी ने मेरे लिए अपनी जान दे दी थी…क्या आपको हमारे प्यार में कहीं भी वासना दिखती है..आज मेरे दर्द का जिम्मेदार कौन है….आज मेरी अनिंद्रा की बिमारी और कभी न हस पाने का जिम्मदार कौन है…क्या सोचते है राखी के घर वाले की राखी मुझसे दूर है? नहीं राखी की रूह आज भी मेरे पास है, राखी आज भी मुझसे प्यार करती है और अपने माँ बाप से नफरत…….
मुझे आपसब से जवाब चाहिए………….हिन्दुस्तान में सच्चे प्यार को राधा कृष्ण से जोडकर नहीं बल्कि अपराधियों की तरह देखा जाता है…..क्या हमारा प्यार गलत था…क्या हम गलत थे अगर प्यार करना गलत है तो उखाड़ फेको राधा-कृष्ण की मूर्तियों को…….समाज का दोगला चरित्र  है ये…..एक तरफ राधा कृष्ण को एक साथ पुजते है और दूसरी तरफ दो दिलों को जुदा करते है….
आप सबसे अपनी पूरी कहानी साझा करते हुए कई बार ऐसा हुआ की मुझे नींद की दवाइयां लेना पडा…

आप सब से विनम्र निवेदन है की आपसब मेरी राखी की आत्मा की शान्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना जरूर करें…

आप सबका
आकाश तिवारी

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85 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा
June 3, 2014

प्रिय आकाश भैया प्रणाम और दीदी को भी आज मन बहुत दुखी है आपकी ये संस्मरण शायद मुझे बल प्रदान करती है इसीलिए तो यहाँ बार बार आता हूँ ये संस्मरण तो अमूल्य निधि है सप्रेम सुप्रियो

mayankkumar के द्वारा
December 21, 2012

आपके विचारों सहमत,पर क्‍या करें हम मानव महामानव नहीं बन सकते, आपका लेख पढ् दिल को संतुष्टि मिली। हमारे ब्‍लॉग् पर भी जाऐं ा  सधन्‍यवाद ।

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 6, 2012

अगर जागरण की तकनीकी टीम मेरे इस कमेन्ट को देख रही है तो कृपया मेरी मदद करे मई अपना पासवर्ड भूल गया हु या यूँ कहू की आईडी और पासवर्ड दोनों..मेरी जो भी मेल आईडी रजिस्टर्ड हो उसपर कृपया मेरी आईडी और पासवर्ड दोनों जल्द से जल्द भेजने का कास्ट करे मई फिर से जागरण पर सक्रीय होना चाहता हु इसी आईडी के साथ..उम्मीद करता हु जल्द से जल्द जवाब मिलेगा… \आकाश तिवारी

Ravindra K Kapoor के द्वारा
March 23, 2012

आपकी ये कहानी उन तमाम युवाओं की कहानी है जो आज भी पुराने रूढ़िवादी संस्कारों में जीते हैं पर अब बहूत कुछ बदल रहा है शायद ये बातें भी बदलें. वृन्दावन और गोकुल के आस पास को World Heritage बना कर ( “आईये वृन्दावन और गोकुल बचाएं” पहला चरण ) अपने देश के गौरव और सांस्कृतिक विरासत को बचाने हतु एक छोटा सा प्रयास मेरा भी है कृपया Signature Campaign में आप अपना बहुमूल्य सहयोग दे कर इसे अपना प्रयास बनाने के लिए आगे आयें. ये मातृभूमि आपकी ऋणी रहेगी. सुभकामनाओं के साथ…रवीन्द्र

chandanrai के द्वारा
March 15, 2012

आदरणीय साहब, आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

mparveen के द्वारा
February 29, 2012

आकाश जी जब कोई इसे पढ़कर अपने आंसू नहीं रोक पाई तो जब आप लोगों पर गुजरी होगी तो क्या हुआ होगा . बहुत की कारुणिक कहानी . राखी चली गयी पर एक सपना छोड़ गयी आपके लिए .. भगवन से हमारी प्रार्थना है की आप जिंदगी में खूब बढ़ें , खूब तरक्की करें और राखी के सपने को साकार करें !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 29, 2012

    प्रवीन जी, मेरी यह कहानी कई भागों में है पूरी जरूर पढ़े… आशीर्वाद के लिए धन्यवाद.. आकाश तिवारी

February 21, 2012

आकाश जी, आपकी कहानी पढ़ने के बाद क्या प्रतिक्रिया दूँ कुछ समझ नहीं आ रहा है….बस इतना कहूँगा कि राखी की आखिरी इच्छा जरुर पूरा कीजिये. नहीं तो वो खुद को माफ़ नहीं कर पायेगी और खुद को उस लायक बनाइये कि आपकी एक फूंक से इस समाज के झूठे रीति-रिवाज और इनकी शान-मर्यादाएं तहश-नहश हो जाये. यदि भविष्य में कैरियर को लेकर मेरी किसी सलाह की जरुरत आन पड़ी तो मुझे याद करिय्र्गा. खुद को खुश नशीब समझूंगा. हमेशा मैं आपके साथ हूँ………….कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या लिखूं. हो सके तो मुझे आप माफ़ कर दीजियेगा.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 21, 2012

    अनिल जी, मेरे लिए आप कुछ कर सकते है तो बस इतना कीजिये..सारी दुनिया के सामने अपने प्यार को अपने पास ले आइये बस….उसे अपना बनाइये… इतने दिनों बाद इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया पाकर बहुत प्रशन्नता हुई…. आकाश तिवारी

    February 22, 2012

    आपकी यह पोस्ट, मैं पहले भी देखा था. मगर इसका शीर्षक कुछ ऐसा था कि ध्यान नहीं दिया. अतः इसके लिए माफ़ी चाहूँगा.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 22, 2012

    अनिल जी, आपने बताया नहीं आप अपने प्यार को पाने के लिए कोई कदम उठा रहे है या नहीं… आकाश तिवारी

    santosh kumar के द्वारा
    February 29, 2012

    आकाश जी ,.आपकी मार्मिक कहानी पढकर मैं भी निःशब्द हूँ ,. ,.आपके दर्द को मात्र महसूस करके रूह काँप जाति है ,.पोस्ट में आपने नाम आर्यन त्रिपाठी लिखा है ,क्या लिखूं?….भगवान सद्बुद्धि दें इन पाखंडी अहंकारी माँ बापों को …..राखी के लिए आप हौसले से जिंदगी जियें यही कामना है …

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 29, 2012

    संतोष जी, उम्मीद करता हूँ मेरी पूरी कहानी आप पढेंगे… आकाश तिवारी

tosi के द्वारा
February 21, 2012

नमस्कार आकाश जी ! सबसे पहले तो मैं आपसे माफी चाहूंगी । आपकी सच्चाई जाने बिना ही मैं आपसे मज़ाक कर बैठी । शर्मिंदा हूँ … सारा लेख पढ़ने के बाद सच्चाई समझ आई । बात गंभीर है । आपके जीवन में जो भी घटा है सचमुच दुखद है । में निरुत्तर हूँ पर इतना कहना चाहूंगी की आप अपनी मोहब्बत को अपनी हिम्मत बनाइये और जो आपकी अपनी आपसे चाहती थी वो करके दिखाइये … कई बार हमें जब अपना कोई छोडकर जाता है तो सचमुच ऐसा लगता है की बस ज़िंदगी खतम । पर नहीं ।मेरा ही एक शेर है जो में यहाँ कहना चाहती हु ……. कोई मुझे कत्ल करता किसी की क्या मजाल थी वो तो मेरा खुदा ही था जो मुझसे रूठ गया ….. तो किसी को दोष मत दीजिये । होता वही है जो भाग्य मे लिख होता है … आपने तो बहुत कोशिश की थी पर अगर संबंध नहीं जुड़ सका  तो आप दोषी नहीं । न ही कोई और … आप मेरी बात से शायद सहमत न हो पर मैंने भी ऐसा ही कुछ खोया है

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 21, 2012

    पूनम जी, आपने खुद को शर्मिन्दा महसूस करके मुझे जो तकलीफ दी है बता नहीं सकता… आपने वही किया जो एक आम इंसान करता है..गलती तो तब होती जब आप सबकुछ जानते हुए ऐसा करती.. बहुत ख़ुशी है मुझे की मेरी इस पोस्ट पर आज भी लोगो की प्रतिक्रिया आ रही है… धन्यवाद.. आकाश तिवारी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 20, 2012

प्रिय तिवारी जी, सस्नेह मैंने पढ़ा सराहा फिर जाना की ये आप की रिअल कहानी है १४ .२.१२ को पोस्ट(कुशवाहा) मेरी अधूरी प्रेम कहानी कृपया देखें , अलीन जी की व्यथा भी कम नहीं है. आपकी व्यथा को कहानी नाम नहीं सच्ची घटना है. मुझे व्यक्तिगत तौर पर दुःख है. आगे कहने की स्थिति मैं नहीं हूँ . दर्द को दर्द ही समझ सकता है. शांति के प्रार्थना करता हूँ.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 21, 2012

    प्रदीप जी आप मेरे ब्लॉग पर आये और इतनी पुरानी कहानी पर प्रतिक्रिया दिया.. मन बहुत हर्षित हुआ.. आकाश तिवारी

abhishektripathi के द्वारा
February 15, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

Piyush Kumar Pant के द्वारा
February 12, 2012

आकाश भाई…… अपनी आप बीती को पुनः प्रकाशित कर आपने एक बार फिर साहस का परिचय दिया है… दुख का साहस से सामना करना ही मनुष्य की जीवटता को दर्शता है…… आपके कोमल हृदय पर क्या बीती होगी इसका हम अनुमान भी नहीं लगा सकते है…..

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 21, 2012

    पियूष जी, पुनः तो नहीं प्रकाशित किया…लेकिन आपकी प्रतिक्रिया पाकर दिल को बहुत प्रसन्नता हुई.. आकाश तिवारी

SUSH के द्वारा
November 16, 2011

प्रिय आकाश तिवारी जी, मैँने आपकी कहानी एक साल से पहले पढी थी और देखो ना आज 1 साल 6 महिने बाद उसी भावना के साथ पोस्ट कर रहा हूँ जैसा मुझे पहली बार पढकर FELL हुआ था। मैँ ऐसा इस लिए हो पाया है क्योकि मैने भी किसी से सच्चा प्यार किया है। यह बात तब की है तब मै स्कूल मे पढता था अब मै उन से दूर हूँ और दूर नही रह सकता। आपकी कहानी पढकर मेरा मन आप से मिलने का करता है फोन पर बात करने का करता है मैँ बाद मे और पोस्ट करूगाँ। मेरी भी हालात आपकी तरह खराब है बस आपसे मिलना चाहता हूँ। मै ठीक से सो नही पाता सोने के लिए नीँद की दवाईयाँ लेनी पडती है और पढाई करनी पडती है। PLEASE HELP ME!!! (मैँ डरा नही रहा हूँ मै तो सिर्फ और सिर्फ एक बार आपसे एक बार बात करना चाहता हूँ क्योकि मै आपको और आपने करीब पाता हूँ और शायद इस कलयुग मेँ ऐसे प्यार करने वाले ढुढने से भी न मिले.) sushant102wwe@yahoo.com

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 21, 2012

    sush जी, इतने दिनों बाद भी लोग इसे पढ़ रहे है जानकर बहुत प्रसन्नता हुई… प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया. आकाश तिवारी

akhlesh के द्वारा
November 16, 2011

Apki is dukhad atmakatha ko pdkar,bahut dukh hua,or apne ateet ki v yad agyi. Hmari kahani v bilkul esi h,bs antr itna h,isme ummid baki h. Kya bhagkr shadi krna pap hai? Jb ghrwale raji n ho to? Ese me bs mrjana hi ekmatr upay h? Kyuki esi paristhiti me,ghrwalo ki mrji se shadi krna to,mout se bura hoga. Kya main kuch had sahi hu?

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 21, 2012

    अखिलेश जी, प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से अभिनन्दन.. आकाश तिवारी

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
June 3, 2011

प्रिय राकेश भाई बहुत ही गंभीर मन को छू लेने वाला ये आलेख आप का इसका जबाब देना बहुत मुश्किल काम है हालत ही बयां करते हैं जबाब को कौन सी परिस्थिति में क्या होता है ये समाज है इस में लाज है मान है मर्यादा है हर घर परिवार की कुछ अपनी इज्जत अलग मान है सब के ख्वाब कुछ अलग होते हैं सब अपने बेटे बेटियों के लिए कुछ अलग सोच रखते हैं और चाहते हैं की उनकी संतान कुछ उन्हें भी माने जिसके लिए वे इतने दिन मरे हैं जियें हैं पल भर में सब मर्यादा धुल धूसरित न कर दे कहीं कहीं माँ बाप दिल को मन भी लेते हैं तो ये कडवा समाज उन्हें जीने नहीं देता बेटी भाग गयी उनके साथ कह देता है मुंह काला हो जाता है बहुत कुछ है आकाश जी फिर भी ये लेख प्रेम की कहानी बहुत ही प्यारे और संजीदा ढंग से वर्णित कर सका -प्यार जुर्म नहीं इसे मानना चाहिए हाँ कोशिश हो की दोनों पक्ष सहमत हो जाएँ प्यार ये प्यार आजीवन बना रहे मुझे आपसब से जवाब चाहिए………….हिन्दुस्तान में सच्चे प्यार को राधा कृष्ण से जोडकर नहीं बल्कि अपराधियों की तरह देखा जाता है…..क्या हमारा प्यार गलत था…क्या हम गलत थे अगर प्यार करना गलत है तो उखाड़ फेको राधा-कृष्ण की मूर्तियों को…….समाज का दोगला चरित्र है ये…..एक तरफ राधा कृष्ण को एक साथ पुजते है और दूसरी तरफ दो दिलों को जुदा करते है… शुक्ल भ्रमर ५

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    June 4, 2011

    श्री शुक्ल जी, मैंने अपनी आत्मकथा को कई भागों में पोस्ट किया था मै चाहता हूँ आप उन सब भागों को अच्छे से पढ़कर बताएं….की क्या गलती की थी हमने…विवाद तो वहा खडा होता है जहां अंतरजातीय प्रेमसम्बन्ध होता है….आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी…. आकाश तिवारी

supriyo kumarsaha के द्वारा
April 21, 2011

प्रिय आकाश भैय़ा प्रणाम आपकी आत्मकथा पढकर वास्तव मे मै वहूत रोय़ा  आप कितने सौभाग्यशाली है जो आपको राखी दीदी जैसा साथी मिला वास्तब  मै आज वासना के पूजारी समाज के ठेकेदार वन बैठेहै प्रिय भैया मै एकछात्र हॅू  और मेऱी कोय गर्ल फ्रेंड नही है आज लोग इसे फैशन मानते है मै हिन्दी टाईप कर ना नही जानता क्षमा करे आप और दीदी भगवान की तरह है और कसीके लिये हो  ना हो मेरे लिये तो हैं                                                                     आपका सुप्रिय

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    June 4, 2011

    प्रिय सुप्रियो, आपने मुझे इतना प्यार दिया इसके लिए आपका बहुत शुक्रिया… आकाश तिवारी

supriyo kumarsaha के द्वारा
April 21, 2011

प्रिय आकाश भैय़ा प्रणाम आपकी आत्मकथा पढकर वास्तव मे मै वहूत रोय़ा आप कितने सौभाग्यशाली है जो आपको राखी दीदी जैसा साथी मिला वास्तब मै आज वासना के पूजारी समाज के ठेकेदार वन बैठेहै प्रिय भैया मै एकछात्र हॅू और मेऱी कोय गर्ल फ्रेंड नही है आज लोग इसे फैशन मानते है मै हिन्दी टाईप करना नही जानता क्षमा करे आप और दीदी भगवान की तरह है और कसीके लिये हो ना हो मेरे लिये तो हैं                                                                     आपका सुप्रिय

munish के द्वारा
February 18, 2011

बहुत ही अच्छी कहानी ……. बहुत अच्छी फीलिंग्स दी हैं आपने मैंने भी पूरा वलेंटाइन वीक मनाया था पढ़िए लिंक दे रहा हूँ. http://munish.jagranjunction.com/2011/02/14/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%87/

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 18, 2011

    मुनीश जी, ये कोई कहानी नहीं अपितु मेरी जिंदगी में हुई वास्तविक घटना है… प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया… आकाश तिवारी

rajeevdubey के द्वारा
February 16, 2011

आकाश जी, कहीं से बहुत सारे लिंकस के बाद आपकी इस आत्म कथा पर पहुँचा….दुःख हुआ आपके जीवन के इस तरह से मोड़ लेने पर… मेरी ओर से आपको शुभेक्षा. ………………….. निश्चय ही आप समय के साथ इस चुनौती पर विजय पाएंगे…हो सके तो जीवन में ध्यान / योग साधन अपनाएं. स्वामी विवेकानंद की राजयोग पर एक पुस्तक है, पढ़ें…पहले पढ़ रखी हो तो दुबारा पढ़ें…मन हो तो विचार विनिमय करें…मेल लिखें . आत्मविजय करें .

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 17, 2011

    श्री राजीव जी, आपने खोजकर मुझे प्रतिक्रिया दी…मुझे बहुत हर्ष हुआ…मुझे न तो कमेन्ट की इक्षा है न मुझे कोई कांटेस्ट जीतने की….बस आपलोगों से लगाव होने के कारण और मेरे कुछ आदरणीय लोगों की अभिलाषा थी की मै अपनी कहानी को शेयर करूँ…मुझे ये वक्त सही लगा सो मैंने वही किया….इस कहानी को पोस्ट करना मेरे लिए कोई मामूली बात नहीं थी वरन मै इस दरमियान बहुत दर्द और तकलीफों से गुजरा हूँ…आपलोग बस यूँ ही साथ देते रहे…. प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया…. आकाश तिवारी

rita singh \'sarjana\' के द्वारा
February 16, 2011

प्रिय भाई आकाश , विलम्ब प्रतिक्रिया हेतु क्षमा चाहती हूँ l दरअसल में मैं १३ फ़रवरी को अपनी रूटीन चेकअप के लिए कलकत्ता गई हुई थी l १४ तारीख को नेट पर वहां बैठकर आपकी कहानी पढ़ते -पढ़ते मेरी आँखे भर आई ,मैं प्रतिक्रिया भी नहीं दे पायी l वहां से लौट आई l आज शाम को घर पहुंचकर प्रथम प्रतिक्रिया आपको ही लिख रही हूँ l भाई आकाश आपकी कहानी का दुखांत बहुत ही मार्मिक हैं , मैं अभी तक सन्न हूँ कि ऐसा क्यों हुआ ? ईस्वक्त भी मैं कुछ लिख पाने में असमर्थ हूँ l आप अपना ख्याल रखे और इस जीवन को सार्थक कीजिये ………..इसी कामना सहित ……….

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 17, 2011

    आदरणीया रीता जी, आपकी रूटीन चेकअप किस चीज की…अब भाई कहा है तो मेरा ये हक़ बनता है जानने का… मै अपनी जिंदगी की एक बहुत ही बुरे दौर से गुजरा हूँ और आज भी उसके जख्म दिख जाते है…रातों को नींद न आना तो मानिए मेरे लिए कोई आम बात है…मैंने बहुत से डाक्टरों से कंसल्ट किया…मगर होता वही है जो दिल कहता है….अगर मेरा दिल गंदा होता तो मै कब का आगे बढ़ गया होता..मगर मेरे जिंदगी का सिर्फ और सिर्फ एक मकसद है कुछ बनना और अपने परिवार की सेवा….इसके लिए शादी करना कोई आवश्यक नहीं…. आकाश तिवारी

Nikhil के द्वारा
February 15, 2011

अच्छी कहानी आकाश जी. बधाई.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद.. आकाश तिवारी

Amit Dehati के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय भ्राता श्री क्षमा करें …..ज्यादा कुछ नहीं कह पाउँगा इस विषय पर ….लेकिन फिर कभी बोलूँगा बंद जुबान से शायद आप समझ जाना !!!!! इतना जान लो की आपके राखी की तरह मेरे भी आँखों में अंशु की वजह से की बोर्ड नहीं दिख रहा ………. बधाई स्वीकारें ! http://amitdehati.jagranjunction.com/2011/02/09/%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B8-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE/

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    श्री अमित जी, आपको मेरी कहानी पढ़कर तकलीफ हुई क्षमा कीजियेगा… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

    Amit Dehati के द्वारा
    February 18, 2011

    भ्राता श्री ……… कुछ पंक्तियाँ …….शायद थोडा दुःख होगा लेकिन अच्छा भी लगेगा …. किसी की यादों ने पागल बना रखा हैं , कही मर न जाऊं , कफ़न सिला रखा है, जलाने से पहले दिल निकाल लेना दुनिया वालों ,…. कही वो न जल जाए जिसे दिल में छुपा रखा हूँ …. क्षमा प्रार्थी तो मैं हूँ,,,,,…… अपने को किसी काम में व्यस्त रखिये ……सुकून मिलेगा … धन्यवाद ! आपका अनुज अमित देहाती

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 24, 2011

    अमित जी,वाह भाई वाह, कही वो न जल जाए जिसे दिल में छुपा रखा है. …. बहुत ही दमदार लाइन ….. आकाश तिवारी

kmmishra के द्वारा
February 14, 2011

भाई आकाश आपकी दर्द में डूबी हुयी कविताओं की क्या वजह थी आज पता चला । मित्र कुछ घाव बहुत गहरे होते हैं जिन्हें भरने में बहुत समय लगता है और वे भरने के बाद भी एक टीस देते रहते हैं । लेकिन राखी जी की अंतिम इच्छा को पूरा करने का प्रयास जरूर करियेगा ।

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय श्री मिश्रा जी, बस यूँ समझिये लगा हुआ हूँ..दिन रात चल रहा हूँ.. प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

roshni के द्वारा
February 14, 2011

आकाश जी आज आपकी पूरी कहानी पढ़ी और पता चला की राखी ने जान दे दी …… अपने उसे क्यों नहीं रोका …. जान देना कोई हाल नहीं है मेरे ख्याल से सबसे आसान मरना ही होता है जीना नहीं… राखी ने एक आसान राह चुन ली मगर अब आप को एक राह चुननी है जीने की और वोह भी दुःख मे नहीं बल्कि राखी का सम्मान करते हुए ख़ुशी से …. क्युकी उसकी आखिरी चाहत आपकी ख़ुशी ही थी …… राखी ने हिम्मंत तो दिखाई मगर काश के वोह जी कर और इस समझ से लड़कर हिम्मंत दिखाती तो शायद आज आप दोनों साथ साथ होते …… आप ने अपनी कहानी में कहा था की उसे लोग बेवफा समझते है हाँ उसने बेवफाई की है मगर आप से नहीं अपने आप से बेवफाई की है …..

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    रोशनी जी, मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था की वो ऐसा कदम उठाएगी…इसके पीछे उसकी क्या मजबूरी थी आज तक मेरे लिए रहस्य है… मै बहुत अभागा हूँ..मुझे जीने का कोई हक़ नहीं था फिर भी जी रहा हूँ.. प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 14, 2011

आकाश जी नमस्कार,भाई साहब प्यार में आपके साथ जो कुछ भी हुआ पर क्या कहा जाय लेकिन हाँ इतना जरुर कहा जा सकता है की आप और राखी ही ऐसे प्रेमी नहीं हैं इस धरती पर जिन्हें अपनी मंजिल नहीं मिली,कभी कभी स्थितियां कुछ भी करने पर मजबूर होती है,सबसे पहले तो राखी के द्वारा लिया गया फैश्ला शायद एक प्रेमी को सोभा नहीं देता और फिर बाद में आपका ये शादी न करने का प्रण,,,,,,भाई जिन्दगी लम्बी है जैसा की आदरनीय शाही जी ने अपने उच्च विचारों के माध्यम से समझाने का प्रयाश किया है की एक इन्शान की और भी जिम्मेदारियां होती है जिसे पूरा करना उसका परम कर्तब्य होता है,और फिर यहाँ आपको एक बात और ध्यान में रखना चाहिए की आपकी जानू ने आपसे कोई वादा भी किया है आपको कुछ बनना है तो इसका भी ध्यान रखना होगा आपको,,,,,,,,,,,,,,,,,और हाँ एक बात और कहना चाहूँगा ऐसी ही किसी बात पर किसी प्रबुध्ह ने ये कहा है की ….कभी किसी के लिए मत रो क्योंकि जिसके लिए तुम रो रहे हो वो तुम्हारा अपना नहीं है और वो जो तुम्हारा अपना होगा वो तुम्हे कभी रोने नहीं देगा….! बाकि अगर कुछ ज्यादा कह दिया होऊंगा तो छोटा भाई समझ कर माफ़ कर दीजियेगा,धन्यवाद!

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    श्री धर्मेश जी, यंहा आपकी बातों से ऐसा महसूस हो रहा है की राखी मुझको पया नहीं करती थी….अगर उसने कोई गलत फैसला लिया था तो क्या वो मुझसे प्यार नहीं करती थी…एक दिन सबको दिखा दूंगा की क्या थी मेरी राखी… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

chaatak के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय आकाश आपको मेरी बात शायद बुरी लगे लेकिन किसी का आत्महत्या कर लेना प्यार नहीं दर्शाता सिर्फ एक निर्णय (वह भी गलत) लेने की क्षमता दर्शाता है| आप राखी की यादों से खुद को बाहर निकालिए और किसी भी तरह से स्वयं को कमजोर न महसूस करिए| ये मैं इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि आप मुझे प्रिय हैं बल्कि इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि आप साहसी हैं| क्षण भर का साहस दिखा कर मौत को गले लगाना प्यार नहीं बल्कि जीते हुए हर घडी संघर्ष करना और हर परिस्थिति का सामना करना जिसमे सिर्फ हार ही हिस्से में आती है इसे प्यार की जीत कहते हैं| आप कक्षा ९ के प्यार की बात करते है मैं तो समझता हूँ अभी भी आपको प्यार की समझ नहीं है| सदमों से बाहर निकलो !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    श्री चातक जी, प्यार ९ का हो या ९० का प्यार प्यार होता है… हमने कोई गलत काम नहीं किया था और न कुछ गलत कर रहे थे…मगर ये समाज के ढोंगी लोग …… मै जिस तरह जीवित हूँ ये केवल मै ही जानता हूँ… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

R K KHURANA के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय आकाश जी, एक अच्छी मार्मिक कहानी के लिए बधाई आर के खुराना

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय श्री खुराना जी, आशीर्वाद के लिए शुक्रिया… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

allrounder के द्वारा
February 14, 2011

आकाश भाई, आपकी कहानी सचमुच बहुत ही मार्मिक और भाव बिव्होर करने वाली है !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    श्री सचिन जी आपलोग सिर्फ कल्पना ही कर सकते है की मेरे उप्पर क्या बीती थी और क्या बीत रही है… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

baijnathpandey के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय आकाश जी ……आपकी कहानी दिल को छू गयी | मै सारे ज़माने वालों से कहना चाहूँगा की प्रेम की नृशंस हत्या कर बलिदान का पाठ पढाना आसान है किन्तु खुद ऐसी जिंदगी जीना कठिन | आखिर ऐसे समाज का क्या अर्थ जहाँ प्रेम हीं नदारद हो | दूसरों को हसता देखकर हम भी हँसना सीखें -यही दुआ है | http://baijnathpandey.jagranjunction.com/?p=125

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    श्री बैजनाथ जी, प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

rajni thakur के द्वारा
February 14, 2011

आकाश जी, प्रतिक्रिया देना मुश्किल लग रहा है..क्या कहूँ !…अत्यंत मार्मिक वृतांत जिसे बर्दास्त करने वाला ही समझ सकता है कि…. दिल के घाव हैं ये दिखाए नहीं जा सकते.आप राखी के सपनों को पूर्ण करें,इश्वर से हमारी यही प्रार्थना है.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 15, 2011

    रजनी जी, बहुत दुःख है मुझे..बहुत तकलीफ भी… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 14, 2011

आकाश जी आपकी कथा .. भावुक करने वाली है .. और आपके प्रश्न भी तार्किक है ..पर एक बार अपने आपको एक प्रेमी की स्थिति से हटाकर सोचिये आपके प्रेम की जरुरत पूरी दुनिया को है… जान देकर या ऐसा कोई भी कदम उठाकर आप अपने प्रेम को हरा देते …दुनिया की नजरो में.. बड़ी चुनौती मर जाना नहीं होता बल्कि जीना होता है और वह भी पूरी शिद्दत के साथ जीना.. आप सबसे पहले एक इंसान है और और आपका सबसे पहला प्रेम आपका जीवन है क्योकि इसी से आप ईश्वर द्वारा दी गई जिम्मेदारियों को निभाते है.. हा अगर आपके जान देने पर ईश्वर या मानवजाति का कोई कार्य सिद्ध होता है मै आपको या किसी को भी जान देने की सलाह दूंगा.. लेकिन ये आप भी जानते है की ऐसा नहीं होता है.. जान देने से सर कष्ट होगा ,,राखी को , आपके माता पिता को और मित्रो को.. जीकर और इस जीवन को परमार्थ में लगाकर ये सिद्ध कर सकते है की आप अपने जीवन में एक सच्चे प्रेमी रहे है .. खोखले प्रेमी नहीं….विवाह करे और हमें भी आमंत्रित करे.. ये जीवन इतना अधिक सकारात्मक है.. जिसका आपको अंदाजा नहीं होगा.. शेष सारी बाते नीचे की टिप्पड़ियो में आपके वरिष्ठजन कह चुके है….. शुभकामनाये शुभकामनाये…

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    श्री निखिल पांडे जी..अभी मैंने श्री पारीख जी से कुछ बाते शेयर की है आपसे भी करता हूँ.. जैसा की आपलोग चाह रहे है की मै शादी कर लूँ..और अपनी ज़िन्दगी को ख़ुशी-ख़ुशी जियूं.तो क्या ये सही है की एक अरफ एक लड़की जो मुझे बहुत प्यार करती थी मेरे लिए अपनी जान दे देती है और मै कायर की तरह आज भी जीना हूँ…क्या ये कम है की मैंने अपनी जान नहीं दी…क्या मै राखी के लिए छोटा सा बलिदान नहीं दे सकता…या फिर नहीं देना चाहिए…ये तो सरासर अन्याय होगा मेरे और राखी के प्यार में…प्यार तो एक बार ही होता है…शादी के बाद भले ही मुझे अपनी पत्नी के साथ रहने की आदत हो जाए मगर प्यार तो किसी भी शर्त पर नहीं हो सकता….कल को उसने कही खुद को राखी से कम्पेयर कर दिया तो मेरे लिए मरने जीने की बात हो जायेगी…क्योंकि इस धरती पर मेरे लिए केवल और केवल एक ही राखी थी वो मेरी जानू….आपसब ने मेरे बढे भाई का और सीनियर का फर्ज निभाते हुए जो भी सुझाव दिया वो कहीं से भी गलत तो प्रतीत नहीं हो रहा मगर..मेरी बातों पर जरूर गौर करें… आकाश तिवारी

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 14, 2011

    आकाश जी आप राखी का ख्वाब जरुर पूरा करे..

Arvind Pareek के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय श्री आकाश तिवारी जी, यह दुखद वृतांत सुनकर दुख तो होना ही था। आदरणीय शाही जी ने जो कुछ लिखा उसे सभी की और से मान लीजिए। रही बात दोष देने की तो मेरा तो अब भी यही मानना है कि दोष किसी का भी नहीं हैं सिर्फ देखने का नजरिया अपना अपना होता है। देश, काल, समाज व परिस्थितियां के अनुसार कार्य होते व घटते है। पंडित है तो आप भी जानते है कि प्रारब्‍ध का लेख बदल नहीं सकता। आप अपने इस वृतांत में कई स्‍थानों पर दुसरों को दोष ना देने की बात लिख चुके हैं फिर भी किसी ना किसी पर दोष मढ़ना चाहतें हैं और उसकी आड़ लेकर अपने को कष्‍ट देना। लेकिन इससे क्‍या होना है। चाहे राखी का पत्र हो या आपकी मॉं का अथवा इस मंच के सभी पाठकों की टिप्‍पणियां हो कोई भी आपके स्‍वयं को कष्‍ट देनें की बात से संतुष्‍ट नहीं है। क्‍योंकि जीवन चलने का नाम है इसलिए बस इसे हंसी-खुशी जीना चाहिए। जो रात गई वह बीत गई अब आगे की सुधि लेनी चाहिए। शेष आप स्‍वयं समझदार हैं जो अच्‍छी रचनाएं रच रहें हैं तो इसे भी समझेंगें। अरविन्‍द पारीक

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    श्री अरविन्द जी, जैसा की आपलोग चाह रहे है की मै शादी कर लूँ..और अपनी ज़िन्दगी को ख़ुशी-ख़ुशी जियूं.तो क्या ये सही है की एक अरफ एक लड़की जो मुझे बहुत प्यार करती थी मेरे लिए अपनी जान दे देती है और मै कायर की तरह आज भी जीना हूँ…क्या ये कम है की मैंने अपनी जान नहीं दी…क्या मै राखी के लिए छोटा सा बलिदान नहीं दे सकता…या फिर नहीं देना चाहिए…ये तो सरासर अन्याय होगा मेरे और राखी के प्यार में…प्यार तो एक बार ही होता है…शादी के बाद भले ही मुझे अपनी पत्नी के साथ रहने की आदत हो जाए मगर प्यार तो किसी भी शर्त पर नहीं हो सकता….कल को उसने कही खुद को राखी से कम्पेयर कर दिया तो मेरे लिए मरने जीने की बात हो जायेगी…क्योंकि इस धरती पर मेरे लिए केवल और केवल एक ही राखी थी वो मेरी जानू….आपसब ने मेरे बढे भाई का और सीनियर का फर्ज निभाते हुए जो भी सुझाव दिया वो कहीं से भी गलत तो प्रतीत नहीं हो रहा मगर..मेरी बातों पर जरूर गौर करें… आकाश तिवारी

rajkamal के द्वारा
February 13, 2011

प्रिय आकाश भाई …. नमस्कार ! आप की इस पाक पवित्र प्रेम कहानी का आज का भाग बहुत ही दुखद है …. इसका आभास तो कल को ही कुछ -२ हो गया था , लेकिन अपने ही मन को तसल्ली देना चाहता था की ऐसा कुछ नही है …. आप का दुःख वास्तव में ही असहनीय है …. लेकिन समय अपना काम करता है ….. जिंदगी को जीने लायक बनाता है , दुःख को किसी हद तक सहने लायक बनाता है …. भगवान से यही प्रार्थना है की वोह आपकी रखी की आत्मा को शांति दे और आपको जिंदगी जीने का हौंसला दे

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 13, 2011

    श्री राजकमल जी, मेरी जिंदगी अब एक सादा पन्ना है जिसको भरा नहीं जा सकता…मै शादी करके अपने प्यार को बांटना नहीं चाहता..और किसी लड़की को धोखा भी नही देना चाहता..क्योंकि जिस लड़की से मेरी शादी होगी मै उसको कभी प्यार नहीं कर पाऊंगा…. आकाश तिवारी

    आर.एन. शाही के द्वारा
    February 13, 2011

    आकाश भाई, ज़िंदगी बेशक आपकी है तो फ़ैसला लेने का सर्वाधिकार आपके ही नाम सुरक्षित है । कोई चाहकर भी एक हद से अधिक अतिक्रमण नहीं कर सकता, अन्यथा मैं तो आज कह रहा हूं, संभवत: आपके परिवार वाले अभी तक न जाने कितनी बार आपको समझाने का प्रयास कर चुके होंगे । इतना जान लीजिये कि परमपिता की ओर से भी भावना के ऊपर कर्त्तव्य का स्थान दिये जाने का निर्देश मनुष्य जाति को प्राप्त है, क्योंकि मनुष्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ और परमात्मा का प्रिय पात्र रहा है । सवाल आपके अपने हृदय की भावनाओं का नहीं है, बल्कि सांसारिक कर्त्तव्य और मूल्यों का है, जिसके प्रति हर पुत्र को अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करने हेतु परिवार और समाज के हित में स्वयं की भावनाओं का दमन कर समझौते करने पड़ते हैं । मात्र अपनी आकांक्षाएं पूरी करने के लिये यदि कोई मृत्यु का वरण कर ले, तो वह परिवार और समाज की नज़रों में कभी सम्मान का पात्र नहीं बन पाता । सामाजिक प्राणी होने के नाते हम ऐसे तमाम कर्त्तव्यों के साथ बंधे हुए होते हैं, जो हमारे दिल को मंज़ूर नहीं होते, परन्तु हमें करना ही पड़ता है, जन्म देने वाले माता-पिता की खुशियों के लिये, अन्य पारिवारिक सामाजिक नाते रिश्तेदारों की आकांक्षाओं के लिये भी । अंत में इस कर्त्तव्य निर्वाह में ही हमारी आत्मिक संतुष्टि भी सन्निहित है । ऐसा न कर हम अपने भीतर तमाम कुंठाओं को जन्म देते रहते हैं, जो कभी चैन की सांस नहीं लेने देतीं । वक़्त किसी भी घाव के लिये सबसे बड़ा मरहम होता है । हम इतनी देर कर दें कि बाद में फ़ैसले में होने वाली देर के लिये भी पछताना पड़े, किसी के लिये भी हितकर नहीं होता । आपका एक त्याग कितने सारे दिलों का सुकून वापस ला सकता है, ज़रा इसपर गौर करते हुए गम्भीर चिंतन करें, फ़िर कोई निर्णय लें तो उचित होगा । आपकी होने वाली पत्नी के भाग्य में होगा तो वह अपनी नि:स्वार्थ सेवा से आपका दिल जीतकर अपना प्यार प्राप्त कर ही लेगी । वैसे भी आप जैसा प्यार करने वाला इंसान निश्छल प्रेम के आगे बहुत देर तक अविचलित नहीं रह सकता । धन्यवाद ।

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    आदरणीय श्री शाही जी, मैंने अपने कर्तव्य निर्वाह का भी इन्तेजाम कर दिया है जब मै अपने उम्र के तीसवे साल में प्रवेश करूँगा तो मै एक नवजात लड़की को गोद लूँगा और सारी जिंदगी उस लड़की और अपनी माँ-बाप के साथ बिता दूंगा…अंतिम पड़ाव पर ईश्वर मुझे जरूर इसका कोई फल अवश्य देगा….अभी तो मै अपने भविष्य की ओर ध्यान दे रहा हूँ..आपका सुझाव अभी भी चाहिए,,

आर.एन. शाही के द्वारा
February 13, 2011

प्रिय भाई आकाश जी, शुभाशीष । मैं आज आपकी जीवनी (अब इसे कहानी नहीं कह सकता, पवित्र भावनाओं का अपमान होगा) पढ़कर इतना विचलित हूं, कि पढ़ने के काफ़ी देर बाद टिप्पणी लिखने का साहस कर पाया हूं । मुझे विगत दिनों में आपको अपनी आत्मकथा लिखने पर ज़ोर डालने के क्षण भी याद आ रहे हैं, और मेरे दबाव पर आपकी चुप्पी और फ़िर असमर्थता जताया जाना भी याद आ रहा है, परन्तु उसके पीछे के आपके कारुणिक भाव को आज समझ पा रहा हूं । हो सके तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा । अपने सीने में दर्द का तूफ़ान समेटे आपने बलपूर्वक हमारे साथ मित्र-धर्म का निर्वाह किया, और ज़बर्दस्ती मुस्कुराते रहे हैं, यह आप जैसे प्यार करने वाले इंसान के ही बूते की बात थी । धन्य हैं आप आकाश जी, हमें आप पर अत्यंत गर्व है, कि आप जैसा साथी हमारे बीच है । राखी ने अच्छा किया या बुरा, इसपर टिप्पणी करना उस हुतात्मा के साथ ज़्यादती होगी, परन्तु मर कर उसने यह संदेश तो समाज के सामने छोड़ ही दिया है कि इश्क़ पर ज़ोर नहीं चलता, और समाज को ऐसे मामलों में अत्यन्त गम्भीरता पूर्वक विचार करने के पश्चात ही कोई फ़ैसला लेना चाहिये । युवा मन में वास्तविक प्रेम प्रस्फ़ुटित होने के बाद फ़िर वह प्रत्येक रस्मोरिवाज और सामाजिक बंदिशों से ऊपर उठ जाता है । समाज को इस सच्चाई को स्वीकार करना ही चाहिये, अन्यथा हमेशा से ही ऐसे ही परिणाम ज़माने के सामने आए हैं, जैसा आपके मामले में हुआ है । इससे किसी को कुछ हासिल नहीं हो पाया, न राखी को, न आपको, और न ही दोनों परिवारों को । मिली है तो जीवन भर न भूल पाने वाली एक कसक, और शायद पश्चात्ताप की आग भी । लेकिन यहां पर मैं एकबात अवश्य कहना चाहूंगा आकाश भाई, कि जीवन यदि है, तो किसी मुक़ाम पर भी न ठहरना ही उसकी फ़ितरत है । आपको यह सच्चाई अब स्वीकार कर लेने हेतु खुद को तैयार करना ही होगा । सृष्टि के अपने कुछ नियम होते हैं, और वह हमारे हिसाब से नहीं चलती । सैलाब आते हैं, जलज़ले आते हैं, और चले जाते हैं अपने पीछे तबाही और बर्बादी के इंतहाई मंज़र छोड़कर, परन्तु क्या सृष्टि का अंत हो जाता है ? कदापि नहीं । इंसान को नए सिरे से फ़िर एकबार जुटना ही पड़ता है अपने आशियाने को खड़ा करने के लिये । सिर्फ़ अपने लिये नहीं, बल्कि भविष्य की पौध के लिये । यही सृष्टि का नियम है, इंसान का कर्त्तव्य है, और यही परम सत्य भी है । मेरा विचार है कि स्वर्गीया राखी की आत्मा आपको बड़ी उत्सुकता के साथ निहार रही होगी, कि उसकी क्षणिक भावनाओं में बहने के कारण लिये गए निर्णय की वज़ह से उसके आर्यन की ज़िन्दगी और बर्बाद न हो, बल्कि नए सिरे से आबाद होता देखकर ही उसकी आत्मा को शांति भी मिलेगी, और यही उसके प्रति आपकी सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी । यदि आपने इसी प्रकार अपना जीवन उसकी याद में ही काटने का फ़ैसला कर लिया, तो आपका भ्रम होगा कि वह बहुत खुश होगी । उस लोक में पहुंचने वाली आत्माओं की सोच बहुक व्यापक और ईश्वरीय दृष्टियां लिये हुए होती है, हमारे जैसी संकुचित नहीं होती । उसे परम शांति तभी मिल पाएगी, जब आपका घर बस जाए, आंगन में रंगबिरंगे फ़ूल खिलें, और आपके चेहरे पर जीवन की मुस्कान लौट आए । जो सुख वह जीते जी नहीं प्राप्त कर पाई, आपके माध्यम से उन सुखों को देखकर ही उसकी आत्मा प्रफ़ुल्लित होगी, और आत्महत्या करने के अपराधबोध से भी मुक्त हो सकेगी । आज वह दुखी महसूस कर रही होगी कि उसने स्वयं को समाप्त कर आर्यन के भविष्य के साथ अच्छा नहीं किया । उसे इस बोध की छटपटाहट से छुटकारा दिलाने का एकमात्र उपाय यही है कि आप एक अच्छा सा विवाह कर नए सिरे से गृहस्थी बसाकर उसे तृप्त और प्रसन्न करें । मैं इस विषय पर आपके पिताजी से विमर्श करना चाहूंगा, यदि आपकी अनुमति हो तो । टिप्पणी काफ़ी लम्बी हो चली है, मैं उचित समय पर आपसे संपर्क करूंगा । धन्यवाद ।

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 13, 2011

    आदरणीय श्री शाही जी, आपकी इतनी लम्बी प्रतिक्रिया से ही पता चलता है की आप मेरे बारे में कितना सोचते है….. मेरी जिंदगी अब एक सादा पन्ना है जिसको भरा नहीं जा सकता…मै शादी करके अपने प्यार को बांटना नहीं चाहता..और किसी लड़की को धोखा भी नही देना चाहता..क्योंकि जिस लड़की से मेरी शादी होगी मै उसको कभी प्यार नहीं कर पाऊंगा….बाकी बाते जब आप कॉल करेंगे तब/… आकाश तिवारी

    आर.एन. शाही के द्वारा
    February 13, 2011

    मुझे यहां जो कहना चाहिये, मैं अभी-अभी राजकमल जी की प्रतिक्रिया के लिये आपके जवाब के नीचे लिख कर आया हूं ।

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 13, 2011

भाई आकाश जी…… इस दुखद अंत को पढ़कर प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ भी लिखने ओर कहने को नहीं है । जिस घटना को पढ पाना ही हम सबके लिए बड़ा कष्टकारी है वो सब जब आप पर बीता होगा तब आपने कैसे खुद को संभाला होगा…….. ये कल्पना से परे है…… हम सभी राखी जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना ही कर सकते हैं……. और ईश्वर से प्रार्थना है की आपको हमेशा खुशियाँ दे…….. ओर अपने प्रेम की स्मृति के साथ जीने का साहस दें………

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 13, 2011

    श्री पियूष जी, उस समय मेरे द्वारा किये गए प्रयासों की झलक आज भी है….आज मै अनिंद्रा का शिकार हूँ…रात बीत जाती है नींद नहीं आती..बहुत तकलीफ में हु भाई…… आकाश तिवारी

alkargupta1 के द्वारा
February 13, 2011

आकाश जी , कहानी बहुत ही संवेदनीय है पढ़ते-पढ़ते मन दुखी हो गया इश्वर राखी की आत्मा को शांति प्रदान करे !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    आदरणीया अलका जी, आपकी दुवा के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया… आकाश तिवारी

div81 के द्वारा
February 13, 2011

ओह निखिल जी, बहुत दुःख हुआ जानकार, ये बहुत ही दुखद है | आप ने जो वादा अपनी राखी से किया था उसे पूरा कीजिये उनकी आत्मा को शांति जरुर मिलेगी | हमारी भगवन से यही प्रार्थना है की आप को जल्द से जल्द कामयाबी मिले और उनकी आत्मा को शांति मिले

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    div जी, पूरी कोशिश कर रहा हूँ..अब ईश्वर का साथ चाहिए… प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दी से शुक्रिया… आकाश तिवारी

nishamittal के द्वारा
February 13, 2011

आकाश जी दुनिया वालों ने जो दर्द आपको दिया है उसको भुलाना असंभव ही है .आप कृपया एक बार सरस्वती चन्द्र अवश्य देखें.राखी जी की आत्मा की शांति के लिए पुनः ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ,परन्तु राखी जैसी पवित्र प्रेम आत्मा ईश्वर की ही शरण में होगी.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    आदरणीया निशा जी, ईश्वर अच्छे इंसान को धरती पर रहने ही नहीं देता और अपने पास बुला लेता है….मै राखी से प्यार में हार गया….राखी को मै आज भी बहुत याद करता हूँ..और प्यार करता हूँ.. आकाश तिवारी

Ramesh bajpai के द्वारा
February 13, 2011

प्रिय आकाश जी इस प्रेम कथा को पढना सहज नहीं है | यह कहानी समाज के तथा कथित ठेकेदारो के मुह पर करार प्रहार है| मेरे शब्द आपको कितनी तसल्ली दे पाएगे नहीं जानता, पर मै आपके साथ हु | परमात्मा आपको सहस दे व राखी को सितारों सा प्रकाश वान कर शांति दे

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 13, 2011

    आदरणीय श्री बाजपेई जी, आपलोगों का जब से साथ मिला है जिंदगी थोडा सही हो गयी है वरना सब बेकार था.. मेरी जिंदगी अब एक सादा पन्ना है जिसको भरा नहीं जा सकता…मै शादी करके अपने प्यार को बांटना नहीं चाहता..और किसी लड़की को धोखा भी नही देना चाहता..क्योंकि जिस लड़की से मेरी शादी होगी मै उसको कभी प्यार नहीं कर पाऊंगा…. आकाश तिवारी

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 13, 2011

आकाश भाई, आपकी जिंदगी के मार्मिक सच्चाई जानकर दिल भर आया|अब और क्या कहूँ सिर्फ आपकी राखी जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना ही कर सकता हूँ|

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    श्री वाहिद भाई, क्या मेरी राखी आज मुझको देख नहीं रही होगी….मै उसको आज भी बहुत याद करता हूँ… आकाश तिवारी

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 13, 2011

आकाश जी…. प्रेम पर आपकी यह कहानी बहुत ही मार्मिक कथा ही…. इसको पढ़ते पढ़ते ही आँखों से अश्रुधार बह निकली… प्रेम करने वालों से ऐसा व्यवहार बहुत ही निकृष्ट है…. मै एक बात यहाँ पर लिखना चाहूँगा की मई उत्तराखंड के गढ़वाली समाज से ताल्लुक रखता हूँ… और ईश्वर की कृपा से हमारा समाज प्रेम विवाह के विरुध्ध नहीं है और जाति भी बहुत महत्व नहीं रखती है… कुछ मामले अपवाद हो सकते हैं… लेकिन ज्यादातर मामलों में आसानी से प्रेम विवाह संपन्न हो जाते हैं… आज सभी समाज प्रेम की कद्र करें… मै यही प्रार्थना करता हूँ…

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    February 14, 2011

    श्री हिमांशु जी, मै भारतीय सभ्यता को मानता हूँ और ये भी मानता हूँ की ऐसे ही जल्दबाजी में प्रेम विवाह नहीं करना चाहिए…जब तक लड़के का भविष्य स्थिर न हो जाए…मगर आप मेरे प्रेम में देखेंगे की कहीं से भी कोई अड़चन नहीं थी सबकुछ बढ़िया था..मगर क्या मिला इन समाज के लोगों को…आज मेरे इस तकलीफ से क्या सबको सुकून मिला… आकाश तिवारी

    प्रखर मिश्रा के द्वारा
    August 26, 2011

    प्रिय आर्यन ,आशा है राखी की आत्मा प्रेम की अतुल्य बेदी चड़ने के बाद अब मुक्ति मार्ग पर हो ,                                                    मै आज के युवाओ से कहना चाहूँगा की पहले अपनी प्रथमिकताओं से भली भांति परचित हो लें …हर बात का एक सही वक्त एक सही मुमेंट होना चाहिये थोड़ा भी इधर उधर हुआ तो कई सारी सामाजिक भावात्मक समस्याएँ आ जाती हैं उदाहरण आपके सामने है ….कुछ भी गलत सही नहीं होता बस आप स्वयं के व्यक्तित्व को पहचाने …प्राथमिकताओं को तौले फिर जीवन के प्रति कोई परिभाषा गढें….स्वयं की हत्या भावनाओ की हत्या से कही अधिक जटिल है लेकिन सुगम शब्द आज के परिवेश में बहुत प्रासंगिक भी नहीं ….व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है की माँ जीवन का सबसे अधिक मार्मिक पक्ष होता है जब हम उसके जाने के बाद लिये इस दुनिया को नहीं छोड़ते तो किसी तीजे के लिये जीवन त्यागने का निर्णय मै सही नहीं मानता …हम एक बार उसे अनंत पीड़ा पहुंचा कर दुनिया में आते है दोबारा ऐसा करने का हमें कोई हक नहीं है …………………….


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