बेवफ़ाई

जब दिल टूटता है

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अब बलात्कार नहीं करूँगा .....

Posted On: 18 Dec, 2012 Others में

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क्या कोई समस्या है जो बलात्कार से बड़ी है तो जवाब मिलेगा हां..आतंकवाद…किसी देश के लिए सबसे गम्भीर समस्या होती है देश को बाहरी खतरों से बचाना बाद में घर की समस्या हल की जायेगी..जिस देश में अफजल जैसे आतंकवादी को लेकर इतनी उठा पटक हो उस देश से किसी अपराध पर कोई बड़ी कार्यवाही की आशा करना सपने का सच होने जैसा है..

यदि मान लिया जाय की बलात्कार पर पूरी दुनिया से ज्यादा और खतरनाक बहुत ही कठोर दंड बना भी दिया जाए तो दंड तो तब मिलेगा न जब वो बलात्कारी अपराधी घोषित हो..आज इस देश में ऐसे न जाने कितने मामले है जिसमे गुनाह करने वाला अपराधी ही घोषित नहीं हो पाता..ये तो बलात्कार जैसी नाजुक घटना है जिसमे हमारे देश की लाज और हया वाली स्त्री पर हमला होता है…हमारे देश की नारिया वो सारे जुल्मों को सहकर जीना सीखती है..ज्यादा खुलकर न बोलना इनकी प्रकृति होती है आज हमारा देश या फिर हमारे देश की स्त्रियाँ भले ही बहुत माडर्न हो गयी हो..मगर आज भी लड़कियां अपने घर में सबसे खुलकर बात नहीं कर सकती …ऐसे में क्या उम्मीद करे की जिस लड़की साथ बलात्कार होगा वो रोज-रोज कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाएगी..वकीलों के बेहूदा सवालों का जवाब देगी ऐसे सवाल जो बलात्कार की घटना से कई गुना तकलीफ देंगे..और तो और इस देश में कितनों को न्याय की उम्मीद है जागरण वालों को पोल या सर्वे कराकर पता कर लेना चाहिए शायद ही १०% प्रतिशत लोगों को भारत की न्याय प्रणाली पर विश्वास होगा….

यदि इस देश की न्याय प्रणाली शसक्त होती तो कोई भी व्यक्ति गुनाह करने से पहले १०० बार सोचता…अभी मै कुछ दिनों पहले न्यूज़ देख रहा था तो उसमे किसी देश की घटना का जिक्र हो रहा था जिसमे एक व्यक्ति ने एक स्त्री पर तेज़ाब फेका था जिसकी वजह से उस स्त्री की आँख चली गयी..तो वहा पर उस अपराधी को जैसे को तैसा का फैसला सुनाया गया है और तेज़ाब के द्वारा उसकी आँखों को फोड़ने का फैसला दिया गया है..मै विस्तार में तो नहीं बता सकता ..तो जरा सोचिये की क्या अब उस देश का कोई भी व्यक्ति तेज़ाब उठाने से पहले उस घटना को याद नहीं करेगा….यदि कानून बनाना है तो जल्दी न्याय मिलने का कानून बनाना चाहिए पहले बलात्कार का केस तो जल्दी खत्म हो बाद में सजा पर भी विचार हो जायेगा…… मै ज्यादा दूर और गहराई में नहीं जाना चाहता मुझे पता है की मेरा ये लेख कुछ स्त्रियाँ भी पढ़ेंगी इस लिए बलात्कार के समय और बलात्कार के बाद स्त्रिओं की मनोदशा और हालत पर लिखकर उनके दिलों को चोट नहीं पहुँचाना चाहता सबको पता है की जब किसी के साथ जुल्म होता है तो क्या बीतती है..मुझे किसी के दिल को दुखाकर अपने लेख को मसालेदार भी नहीं बनाना बस मुद्दा बहुत गम्भीर है तो मुद्दे की हो बात लिखूंगा….अभी एक साल पहले फिल्म अभनेता शाइनी आहूजा जिनपर उनकी नौकरानी ने बलात्कार का आरोप लगाया और बाकायदा गवाही भी दी और बलात्कार की पुष्टि भी हुई…मगर क्या हुआ ये आपसब प्रबुद्ध जनों के सामने है नौकरानी ने बलात्कार का खंडन कर दिया और शाहिनी आहूजा फिर से जेल से बाहर हो गए मैंने अपने इस पोस्ट में इस घटना का जिक्र सिर्फ इसलिए किया की ये एक हाई प्रोफाइल मामला था क्या आपसबको इस घटना का फैसला सुनाई दिया..नहीं? बल्कि सभी को आश्चर्य हुआ होगा की ये क्या हुआ….तो जब तक किसी मामले पर जल्द से जल्द फैसला नहीं होगा कड़ी सजा के बारे में सोचना ही बेकार है..हमारे देश की न्यायपालिका को चाहिए की कुछ ऐसी व्यवस्था करे की बलात्कार की घटना पर फैसला २-४-१० सुनवाई में आ जाये……….और तत्काल फैसला भी दे दिया जाये..

इस समस्या का एक पहलु और है वो है बलात्कार की घटना में स्त्री पक्ष कमजोर और असहाय होती है और बदनामी के डर से चुप रहती है इसलिए ये घटनाए दिन पर दिन बढती ही जा रही है लेकिन स्त्रियों के पीछे हटने के पीछे भी हमारे देश की अविश्वश्नीय कानून व्यवस्था है स्त्रियाँ भी जानती है की न्याय तो मिलेगा ही नहीं बस बदनामी ही मिलेगी इसलिए स्त्रियों के पैर आगे बढ़ने से रुक जाते है..सबसे पहले हमारे देश की न्याय व्यवश्ता को लोगों का विश्वाश जीतना होगा तभी कुछ हो सकता है…

मेरे विचार से तो एक बलात्कारी अपने जिस अंग की हरकतों की वजह से ऐसा घिनौना काम करता है उसके वो अंग को तेज़ाब से जला कर और काट कर पूरी जिंदगी एक अँधेरी कोठरी में रखना चाहिए और पूरी कोठरी को अश्लील साहित्य और अश्लील वीडिओ से बार देना चाहिए….इससे अच्छा और सटीक सजा मेरी नजर में और कोई नहीं है..मौत की सजा तो बहुत ही मामूली और हल्की है क्योंकि जिसके साथ बलात्कार होता है तो क्या वो मर जाता है नहीं बल्कि पूरी जिंदगी उसी घटना को याद करते हुए वो स्त्री पल-पल मरती है…ठीक वैसे ही उस बलात्कारी को पूरी जिंदगी नपुंसक बनाकर एक काल कोठरी का जीवन देना चाहिए…..फिर वो बलात्कारी यही कहेगा….अब बलात्कार नहीं करूँगा……

*******************

एक अकेला

आकाश तिवारी

*******************

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49 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Makks के द्वारा
May 29, 2013

bahut badhiya lekh bhai iske liye dhanywad, Ye batane ki kripa kre ki .. LEELA aur Blatkar me kya Antar hai

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 7, 2014

    Makks जी, धन्यवाद…

aman kumar के द्वारा
May 20, 2013

पहेली बात तो यह है की आप अकेले नही है |फिर आप अच्छे लेख है जो समाज को दिशा दिखा सकते एक आन्दोलन खड़ा कर सकते आप का लेख बहुत अच्छा है ! http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=81#comments

Indian के द्वारा
December 29, 2012

डियर राजेश जी कोई भी अपराधी अपराध तब करता है जब उसके दिल से सजा का आतंक ख़तम हो जाता है , लेकिन अगर किसी का जीवन इतना नारकीय बन जाये के उसे जीवन बोझ लगने लगे और इस समाज को वो इसका जिम्मेदार समझे तो उसके लिए इस समाज का हर नागरिक दुश्मन के सामान है , वरना हर आतंकवादी,लूटेरा , दरिंदा अपराध तभी करता है जब या तो वोह समाज को दुश्मन समझे या उसे यह विश्वास हो की यह अपराध ही उसके जीवन को बेहतर बनाने का एक मात्र रास्ता है. आपको याद होगा की ऑस्ट्रेलिया के एक प्लेयर ने कहा था मुझे अपने जीवन से बहुत प्रेम है और इंडिया जाकर या क्रिकेट खेल कर मैं इससे खो नहीं सकता हम देखते हैं के अधिकाश अपराधी का जीवन बहुत ही निम्न कोटि का होता है और और वोह इसे बेहतर बनाने के क्रम में गुमराह हो जाते हैं. सऊदी अरब में बहुत कठोर कानून है और आपने देखा होगा की हाल में ही वहां बलात्कार के जुर्म में चार बांग्लादेशियों को सरे आम फांसी दे दी गयी थी ,इसका मतलब ये नहीं है की वहां दुराचार नहीं होता, बहुत होता है, क्योंकि उनके दिल में पकडे जाने या सजा पाने का खौफ नहीं होता , यहाँ वहां कुछ लोगों की मानसिकता इतनी विकृत हो गयी है के उन्हें भी मौत से दर नहीं लगता , जैसे की दामिनी के सन्दर्भ में एक ने खुद को फंसी दिए जाने की वकालत की है, क्योंकि उससे पता है की बहार का जीवन भी उसके लिए कोई राहुल गाँधी स्टाइल का तो हैं नहीं जो उसे अपने जीवन से प्यार हो. संछेप में, हम जबतक लोगों के दिलोन में अपने जीवन से पयार नहीं बिठायेंगे , उनको मुख्या धरा से नहीं जोड़ेंगे , उनमें क्राईम के लिए खौफ नहीं बिठाएंगे सुधार मुश्किल है

के द्वारा
December 29, 2012

डियर राजेश जी कोई भी अपराधी अपराध तब करता है जब उसके दिल से सजा का आतंक ख़तम हो जाता है , लेकिन अगर किसी का जीवन इतना नारकीय बन जाये के उसे जीवन बोझ लगने लगे और इस समाज को वो इसका जिम्मेदार समझे तो उसके लिए इस समाज का हर नागरिक दुश्मन के सामान है , वरना हर आतंकवादी,लूटेरा , दरिंदा अपराध तभी करता है जब या तो वोह समाज को दुश्मन समझे या उसे यह विश्वास हो की यह अपराध ही उसके जीवन को बेहतर बनाने का एक मात्र रास्ता है. आपको याद होगा की ऑस्ट्रेलिया के एक प्लेयर ने कहा था मुझे अपने जीवन से बहुत प्रेम है और इंडिया जाकर या क्रिकेट खेल कर मैं इससे खो नहीं सकता हम देखते हैं के अधिकाश अपराधी का जीवन बहुत ही निम्न कोटि का होता है और और वोह इसे बेहतर बनाने के क्रम में गुमराह हो जाते हैं. सऊदी अरब में बहुत कठोर कानून है और आपने देखा होगा की हाल में ही वहां बलात्कार के जुर्म में चार बांग्लादेशियों को सरे आम फांसी दे दी गयी थी ,इसका मतलब ये नहीं है की वहां दुराचार नहीं होता, बहुत होता है, क्योंकि उनके दिल में पकडे जाने या सजा पाने का खौफ नहीं होता , यहाँ वहां कुछ लोगों की मानसिकता इतनी विकृत हो गयी है के उन्हें भी मौत से दर नहीं लगता , जैसे की दामिनी के सन्दर्भ में एक ने खुद को फंसी दिए जाने की वकालत की है, क्योंकि उससे पता है की बहार का जीवन भी उसके लिए कोई राहुल गाँधी स्टाइल का तो हैं नहीं जो उसे अपने जीवन से प्यार हो. संछेप में, हम जबतक लोगों के दिलोन में अपने जीवन से पयार नहीं बिठायेंगे , उनको मुख्या धरा से नहीं जोड़ेंगे , उनमें क्राईम के लिए खौफ नहीं बिठाएंगे सुधार मुश्किल है

rakesh yadav के द्वारा
December 27, 2012

मेरे हिसाब से ऐसे लोगो को सरे आम बिच चोराहे पर नंगा कर के पहले लज्जित करना चाहिए और इसको टीवी पर पूरी दुनिया को दिखाना चाहिए िफ़र उसको जिन्दा जल देना चाहिए जिससे लोगो में रेप के प्रति दहशत आये. और मेरा मानना है डर भुत को भी भगा देता है. तो रैप क्या चीज है.

December 26, 2012

गाँव की मिटटी की खुशबू को समते हुई सुन्दर रचना…………………. ……………………हार्दिक आभार………………! .कृपया इसे भी पढ़ना चाहें…………………. http://follyofawiseman.jagranjunction.com/2012/12/24/%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%AE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B/

yatindranathchaturvedi के द्वारा
December 22, 2012

गंभीर चिन्तन

Ravinder kumar के द्वारा
December 22, 2012

आकाश जी, सादर नमस्कार. कठोर सजा हो, जिसका डर अपराधी के अंतर तक बैठ जाए. लेकिन अंग को जला देना, कोठरी को अश्लील साहित्य से भर देना जैसे उपाए ठीक नहीं लगते. कानून अगर कानून की तरह काम करेगा तो उचित होगा. प्रभावी लेख के लिए आपको बधाई. लिखते रहिए.

D33P के द्वारा
December 21, 2012

आदरणीय आकाश जी आपके विचारो से सहमत .सार्थक अभिव्यक्ति

minujha के द्वारा
December 21, 2012

आकाश भाई , ऐसे तो आप कभी कभी ही दिखते है पर आपका लिखा हुआ हमें बहुत समय तक याद रहता है,आपके हर शब्द और बात से सहमत,जब तक सजा कङी नहीं होगी ऐसे अपराध तो होते ही रहेंगे

akraktale के द्वारा
December 21, 2012

आकाश जी सादर, बिलकुल ठीक बात है क़ानून प्रक्रिया आसान और शीघ्र न्याय करने वाली होना चाहिए दंड कठोर से कठोर मिलना चाहिए ताकि उसका डर बना रहे. जिसको आपने लिखा है व्यवस्था दोष के कारण ही पीडिता आवाज नहि उठाती बहुत ही आवश्यकता है आज कि बिगड़ी हुई व्यवस्था में सुधार लाने की. 

Manisha Singh Raghav के द्वारा
December 21, 2012

आकाश जी , मैंने आपका लिखा लेख पढ़ा ” अब नही करूंगा — आपके विचार बहुत सही लगे । बलात्कारियों के लिए यही सजा बिलकुल उचित है । ऐसे ही कुछ मेरे विचार हैं जिन्हें मैंने ” बलात्कारी को फाँसी की सजा क्यों ” लिखा है आप मेरे विचारों से भी अवगत होइए ।

Sushma Gupta के द्वारा
December 20, 2012

प्रिय आकाश जी,अपराधी को उचित सजा हेतु आपका चिन्तन व् मनन विल्कुल सही दिशा की ओर है,अतः मैं आपके विचारों से सहमत हूँ …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 20, 2012

मौत की सजा तो बहुत ही मामूली और हल्की है क्योंकि जिसके साथ बलात्कार होता है तो क्या वो मर जाता है नहीं बल्कि पूरी जिंदगी उसी घटना को याद करते हुए वो स्त्री पल-पल मरती है…ठीक वैसे ही उस बलात्कारी को पूरी जिंदगी नपुंसक बनाकर एक काल कोठरी का जीवन देना चाहिए…..फिर वो बलात्कारी यही कहेगा….अब बलात्कार नहीं करूँगा…… किसी हद तक सहमत. काल कोठरी की बजाये खुले में चौराहे पर सुरक्षित बैठाना चाहिए. वो तरसे. तडपे. लेख हेतु बधाई.

Santlal Karun के द्वारा
December 20, 2012

आदरणीय आकाश तिवारी जी, बलात्कार और आतंकवाद जैसी दुखद घटनाओं और जन-पीड़ा की गंभीरता पर पठनीय आलेख; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “इस समस्या का एक पहलु और है वो है बलात्कार की घटना में स्त्री पक्ष कमजोर और असहाय होती है और बदनामी के डर से चुप रहती है इसलिए ये घटनाए दिन पर दिन बढती ही जा रही है लेकिन स्त्रियों के पीछे हटने के पीछे भी हमारे देश की अविश्वश्नीय कानून व्यवस्था है स्त्रियाँ भी जानती है की न्याय तो मिलेगा ही नहीं बस बदनामी ही मिलेगी इसलिए स्त्रियों के पैर आगे बढ़ने से रुक जाते है..सबसे पहले हमारे देश की न्याय व्यवश्ता को लोगों का विश्वाश जीतना होगा तभी कुछ हो सकता है…”

yogi sarswat के द्वारा
December 19, 2012

आदरणीय श्री आकाश जी, बहुत दिनों के बाद दर्शन हुए हैं आपके मान्यवर ! आपने अपने लेखन में बलात्कार जैसे अपराध का उचित दंड आपने खोजा है, किन्तु यह कैसे सिद्ध हो की बलात्कार हुआ है तथा यह कैसे पता चले की बलात्कार हुआ हीं है | हमारे महान भारतवर्ष में किसी भी समस्या का समाधान एक टेढ़ी खीर है | बलात्कार की सजा के बारे में मेरे विचार भी कुछ ऐसे ही है, किन्तु इसे कौन लागू करे | इस देश में पीड़ित को न्याय न मिलना मानवाधिकार का मुद्दा नहीं है किन्तु, अपराधी को कठोर सजा देना मुद्दा बन जाता है ! अच्छी और सार्थक प्रस्तुति !

December 19, 2012

सुस्वागतम आपके विचारों का…………………… इस समस्या का एक पहलु और है वो है बलात्कार की घटना में स्त्री पक्ष कमजोर और असहाय होती है और बदनामी के डर से चुप रहती है…………..(इसके अलावा मान, मर्यादा, परंपरा, दायित्व और धर्म इत्यादि सबकुछ एक औरत के लिए और उसी को तो निभाना होता है…………….. दुनिया भर के बोझ से दबकर शायद ही किसी औरत को यह एहसास होता होगा कि उसके कुछ अपने अधिकार भी है जिससे उसे वंचित रखा जाता है)…………………..हार्दिक आभार….. आपने अपना पक्ष बहुत ही मजबूती से रखा है………………….

Hemendra के द्वारा
December 27, 2011

I agree with author…

anish के द्वारा
December 27, 2011

you have suggested the right punishment. our law has to be strict.

Meenakshi Srivastava के द्वारा
June 8, 2011

आकाश तिवारी जी नमस्ते, आप जैसे भी पुरुष हैं ; इस दुनिया में – जानकर बहुत सुकून मिला -सुकून इस बात का सबसे ज्यादा है ; आप और आप जैसे यदि और लोग भी हैं.. तो.. आगे आकर ऐसी आवाज देंगें ; अर्थात ‘बलात्कार” के खिलाफ एक सख्त आन्दोलन करेंगे – तभी अपने देश में – ऐसा सख्त कानून बन सकेगा ( जैसा कि आपने अपने लेख में चर्चित किया है ) – फिर हर व्यक्ति “बलात्कार ” की सजा के ” खौफ़’ से भयभीत रहेगा , और कभी स्वप्न में भी ” बलात्कार ” करने की नहीं सोचेगा . आप जैसे पुरुष …क्या ..महापुरुष ही साबित होंगे ..यदि ऐसा सफल प्रयास कर सकें . आपके इस सफलतम प्रयास से -आप अपनी, तथा सभी की बेटियों, बहनों ,पत्नी और मां की – तन- मन से सुरक्षित कर पायेंगें – जिससे कि आप सदा सभी कि दुवाओं / आशीषों से सुशोभित होते रहेंगे और आपका यश चारों दिशाओं में फैलेगा . बहुत – बहुत धन्यवाद. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    June 10, 2011

    मीनाक्षी जी, महिलाओं को आत्म रक्षा करना अब आना ही चाहिए क्योंकि इस देश में चारो तरफ भेड़िये ही भेड़िये है…… मेरे द्वारा सुझाई गयी सजा को आपका समर्थन मिला दिल को बहुत ख़ुशी हुई. प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया….. आकाश तिवारी

shiromanisampoorna के द्वारा
May 25, 2011

aakashaji,किसी भी अपराध को सिध्य करने की जो प्रक्रिया हैं वो न केवल जटिल ही है बल्कि अविश्वसनीय भी/ aapke द्वारा निर्धारित सजा के समर्थन में हम सब भी……………….साधुवाद……………….

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 26, 2011

    शिरोमणि जी, मेरे लेख का समर्थन करने हेतु आपका बहुत-बहुत शुक्रिया… *********************** एक अकेला आकाश तिवारी ***********************

baijnathpandey के द्वारा
May 24, 2011

आदरणीय श्री आकाश जी बलात्कार जैसे अपराध का उचित दंड आपने खोजा है, किन्तु यह कैसे सिद्ध हो की बलात्कार हुआ है तथा यह कैसे पता चले की बलात्कार हुआ हीं है | हमारे महान भारतवर्ष में किसी भी समस्या का समाधान एक टेढ़ी खीर है | बलात्कार की सजा के बारे में मेरे विचार भी कुछ ऐसे ही है, किन्तु इसे कौन लागू करे | इस देश में पीड़ित को न्याय न मिलना मानवाधिकार का मुद्दा नहीं है किन्तु, अपराधी को कठोर सजा देना मुद्दा बन जाता है |………… बहुत सार्थक आलेख, शायद किसी की आंख खुले | बधाई |

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    श्री पाण्डेय जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

rita singh \\\\\\\\\\\\\\\'sarjana\\\\\\\\\\\\\\\' के द्वारा
May 23, 2011

प्रिय भाई आकाश , बलात्कारी का दंड बिलकुल भी सहज नहीं होनी चाहिए l ऐसा दंड न तो वह जी सके और न वह मर सके l अच्छी पोस्ट पर बधाई

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    आदरणीया रीता जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

nishamittal के द्वारा
May 20, 2011

आकाश जी वास्तव में स्थिति को सम्भालने के लिए कड़े क़ानून,उनका कठोरता से पालन तथा निष्पक्षता जरूरी है.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    आदरणीया निशा जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

K M Mishra के द्वारा
May 20, 2011

प्रिय आकाश, नमस्कार, हमेशा की तरह एक अच्छी पोस्ट दी आपने. कुछ लोग कहते हैं की जब अपने ऊपर पड़ती है तब पता चलता है. अगर किसी बलात्कारी के परिवार की किसी स्त्री, बच्ची के साथ ऐसी घटना घटती है तो उसे उस दर्द का पता चलेगा लेकिन ऐसा लोग गलत समझते हैं क्योंकि इसी समाज में पत्नी अदल बदल का भी खेल खेला जाता है.  आपसे सहमत हूँ, इस पाप की सजा भी अमानवीय होनी चाहिए जिसे आदमी कभी न भूल पाए. 

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    आदरणीय मिश्रा जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 19, 2011

प्रिय आकाश भाई ….आदाब ! विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र + इस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में ऐसे किसी भी कानून की कल्पना करना भी बेमानी है , एक सुन्दर सपना जरूर कहा जा सकता है ….. :) :( ;) :o 8-) :|

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    श्री राजकमल जी, हिन्दुस्तान में कोई अच्छी व्यवस्था लागू होगी इसके लिए स्वप्न देखने का पूरा अधिकार है..चाहे तो आप इतिहास में झाँक कर देख सकते है… ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

Abdul rashid के द्वारा
May 19, 2011

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी. आगाज तो आपने कर दिया अब अंजाम का इंतज़ार रहेगा. कलम की ताक़त आपना असर जरुर करेगी बस हम आप जागरूक रहे. आपका अब्दुल राशिद http://singrauli.jagranjunction.com/

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    राशिद भाई मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

supriyo के द्वारा
May 19, 2011

आदर निया आकाश भैया एक और सुन्दर लेख आशा के अनुरूप सहृदय धन्यवाद भैया जब तक हम अपने आप को नहीं सुधरेंगे ऐसी परिस्थिति होती रहेंगी हमने देखा है ओइसे लोगो की निगाहों को जो एक असमर्थ लड़की की मदद की प्रत्यासा में उसके सरीर में झाकते है भैया सच मानिये ऐसे ही लोग समाज के ठेकेदार बनते है और अपने को समाज सुधारक कहते है हम आज अगर ऐसे लोगों का बिरोध नहीं करेंगे तो गंभीर परिणाम देखने को मेलेंगी धन्यवाद और प्रणाम आपलोगों का सुप्रिय

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    प्रिय सुप्रियो मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

Alka Gupta के द्वारा
May 19, 2011

आकाश जी , देश में अशक्त न्याय प्रणाली के चलते ही घृणित कार्य करने वाला हर व्यक्ति आज खुली हवा में सांस ले रहा है और उसे बल मिल रहा है अतः इसमें सुधार व समय के रहते उचित न्याय मिलेगा तभी कुछ संभव है अन्यथा जैसा आज है आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा ! अच्छी पोस्ट है !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    आदरणीया अलका जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

Deepak Sahu के द्वारा
May 19, 2011

आकाश जी ! सही कहा है आपने! लचर न्यायिक प्रक्रिया ही सभी तरह के अपराधों की जननी है! अगर न्यायिक प्रक्रिया में सुधार हो जाए तभी अपराधो पर अंकुश लग सकता है! दीपक साहू

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    श्री दीपक शाहू जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

priyasingh के द्वारा
May 19, 2011

मै आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ ………..लेकिन अगर कानून निर्माता आपकी बताई सजा का आधा भाग भी तय कर दे तो ही कुछ हो सकता है ………….सजा की भयावहता अपराध करने वाले को डराती तो है ही ……… एक बात और कहना चाहूंगी किसी एक इंसान के न होने से आप अकेले नहीं हो जाते है …….नज़र उठा कर देखिये आपके साथ फूल पौधे हरियाली सब होते है और आप तो इतने अछे रचनाकार है आपके साथ तो आपकी कलम भी है फिर आप अकेले कहाँ है …..मेरी बात को अन्यथा न लीजिएगा………….

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    प्रिया जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. अकेला तो मै बहुत पहले ही हो गया था..अगर दिल में मन में कोई खुशियाँ होती तो आये दिन यूँ बीमार न रहता…. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

Nikhil के द्वारा
May 19, 2011

आपकी बात सोलह आने सच है आकाश जी, भारत में न्यायायिक प्रक्रिया इतनी लम्बी है की दोषी सजा पाते-पाते इश्वर के पास चला जाता है. न्याय की प्रक्रिया में तीव्रता आवश्यक है.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    निखिल भाई, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************

div81 के द्वारा
May 19, 2011

आकाश जी, बहुत ही सही बात कही है आप ने | लम्बी कानूनी प्रक्रिया के और लचर कानून व्यवस्था जहाँ हो वहां कोई भी कानून लागू कर दिया जाये तो रिजल्ट सिफर ही रहेगा |

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 24, 2011

    div जी, मेरे द्वारा लिखी गयी सच्चाई का समर्थन करने हेतु आपका धन्यवाद…. बस अब आवाज से आवाज मिलाना बाकी है….. ************************** एक अकेला आकाश तिवारी ***************************


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