बेवफ़ाई

जब दिल टूटता है

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अश्क ...गज़ल

Posted On: 25 Mar, 2014 कविता में

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हाल ही में मै दिल्ली के सफ़र पर था..वहा मेरी मित्रता एक ऐसे इंसान से हुई जो जीने कि चाह खो चुका था न कोई ख़ुशी न कोई गम …बस बहुत जल्द उसकी पूरी कहानी आपसे साझा करूँगा अभी उसकी मनोस्थिति पर मेरी एक छोटी सी रचना पेश कर रहा हूँ जो मैंने उससे मिलने के बाद लिखी थी……
अश्कों को समेटूंगा निगाहों में,
भूलके न आउंगा तेरी राहों में,
मिट जाए हस्ती भले एक दिन मेरी,
तेरा ही नाम सजाऊंगा सितारों में..
ठोकर खाऊं भले आज मै राहों में,
डूब जाए कश्ती बेशक मेरी किनारों में,
तेरा ही नाम लेंगी ये साँसे मेरी,
भले न गिने तू मुझे हजारों में..
फिरता रहूँ मै दुनिया के मजारों में,
मंदिर-मंदिर और गुरुद्वारों में,
तेरी ही ख़ुशी कि दुआ करूँगा,
भले बदनाम फिरुँ मै बाजारों में..
चुना जाऊं अगर मै दीवारों में,
तड़पता भी रहूँ जो मै दरारों में,
तेरे हर दर्द को अपनाकर मारूंगा,
भले जलाये तू मेरी यादों को अंगारों में..
=आकाश तिवारी=

हाल ही में मै दिल्ली के सफ़र पर था..वहा मेरी मित्रता एक ऐसे इंसान से हुई जो जीने कि चाह खो चुका था न कोई ख़ुशी न कोई गम …बस बहुत जल्द उसकी पूरी कहानी आपसे साझा करूँगा अभी उसकी मनोस्थिति पर मेरी एक छोटी सी रचना पेश कर रहा हूँ जो मैंने उससे मिलने के बाद लिखी थी……


My Wordsअश्कों को समेटूंगा निगाहों में,

भूलके न आउंगा तेरी राहों में,

मिट जाए हस्ती भले एक दिन मेरी,

तेरा ही नाम सजाऊंगा सितारों में..



ठोकर खाऊं भले आज मै राहों में,

डूब जाए कश्ती बेशक मेरी किनारों में,

तेरा ही नाम लेंगी ये साँसे मेरी,

भले न गिने तू मुझे हजारों में..



फिरता रहूँ मै दुनिया के मजारों में,

मंदिर-मंदिर और गुरुद्वारों में,

तेरी ही ख़ुशी कि दुआ करूँगा,

भले बदनाम फिरुँ मै बाजारों में..



चुना जाऊं अगर मै दीवारों में,

तड़पता भी रहूँ जो मै दरारों में,

तेरे हर दर्द को अपनाकर मारूंगा,

भले जलाये तू मेरी यादों को अंगारों में..

=आकाश तिवारी=

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashutosh Shukla के द्वारा
August 16, 2014

लाजवाब

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 1, 2014

    श्री योगी जी, आपकी प्रतिक्रिया मेरे अंदर एक उत्सुकता पैदा करती है एक और नयी रचना के लिए.. बहुत बहुत शुक्रिया..

Ravinder kumar के द्वारा
March 30, 2014

आकाश जी, नमस्कार. आपने सुंदर ढंग से अपने भावों को शब्दों में पिरोया है. शुभकामनाएं, लिखते रहिये.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 1, 2014

    श्री रविन्द्र जी, प्रथम बार आगमन और प्रतकिया हेतु तहे दिल से शुक्रिया…

yamunapathak के द्वारा
March 30, 2014

सच है सफ़र में कभी कभी कई अविस्मरणीय लोग मिल जाते हैं और बहुत कुछ सिखा जाते हैं . ज़िंदगी भी एक सफ़र ही तो है …. बहुत अच्छी भावाभिव्यक्ति साभार

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 1, 2014

    आदरणीया यमुना जी, प्रतिक्रिया हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया..अच्छा लगा आपकी प्रतिक्रिया पाकर.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 29, 2014

ठोकर खाऊं भले  मै आज राहों में,  डूब जाये किश्ती बेशक मेरी किनारों में,वाह आकाशजी ,लोग खुद के दुःख को शब्दों में ढालते हैं आपने किसी दूसरे व्यक्ति के दर्द को बखूबी से वयां किया है ,उसकी कहानी की प्रतीक्षा है ,बहुत अच्छी रचना ,हार्दिक बधाई

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 30, 2014

    निर्मला जी, आपने काफी ध्यान से ग़ज़ल पढ़ा और इस ग़ज़ल में लिखे दर्द को महसूस किया..अच्छा लगता है जब कोई वो पढता है जो लिखने वाला अल्फाजो से लिखता है.. पढ़ते रहें ..प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

आर एन शाही के द्वारा
March 29, 2014

आप की सुन्दर ग़ज़ल ने बीते दिनों की याद दिला दी आकाश जी । लिखते रहें । बधाई ।

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 30, 2014

    आदरणीय श्री शाही जी, आपने माना नही और प्रतिक्रिया दे ही दी..आपके इस प्रतिक्रिया से ये बात साफ़ झलकती है कि अगर हैम इस मंच पर है तो एक दुसरे से कभी भी अछूते नही रहेंगे..आपने सच कहा जब 3 दिन पहले आपका पोस्ट देखा तो न जाने क्यूँ एक अजब कि ख़ुशी हुई और लगा कि हैम सब फिर एक साथ लिखेंगे.. खैर आपको प्रतक्रिया हेतु कोटि-कोटि धन्यवाद..

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 27, 2014

सुन्दर ,बहुत खूब ,मजा आ गया पढ़कर आभार मदन समय मिले तो कभी इधर का भी रुख करें

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 28, 2014

    श्री मदन जी, आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आयी और मजा आया सुनकर दिल को बहुत ख़ुशी हुई.. प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया.

drsg3 के द्वारा
March 26, 2014

वाहजी बहुत खूब  

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 28, 2014

    धन्यवाद…

nishamittal के द्वारा
March 26, 2014

बहुत खूब एक लम्बे अंतराल के पश्चात सुखद वापसी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 28, 2014

    आदरणीया निशा जी, आपकी कीमती प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया.

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 26, 2014

फिरता रहूँ मै दुनिया के मजारों में, मंदिर-मंदिर और गुरुद्वारों में, तेरी ही ख़ुशी कि दुआ करूँगा, भले बदनाम फिरुँ मै बाजारों में.. प्रिय श्री आकाश जी संवेदनाओ की यह कश्ती तो बस प्यार की सलामती की दुआ ही करती है | इसी को तो प्यार कहते है | भावनाओ के ये मोती शब्दो से बहुत ऊपर है | ईश्वर सब को इस दौलत से नवाजे इसी दुआ के साथ

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 28, 2014

    आदरणीय श्री बाजपेयी जी, आपने बिल्कुल सच कहा..मगर आजके वक्त में अक्सर दिल टूटने पर बदला लेने वाली घटनाएं अक्सर सुनायी देती है,..मई ये नहीं समझ पता कि आखिर जो इंसान किसी से प्यार करता है वो उसका नुक्सान कैसे क्र सकता है या होते हुए देख सकता है.. कीमती प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया..


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