बेवफ़ाई

जब दिल टूटता है

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मुहब्बत को अपना रोजगार बना दिया......गज़ल

Posted On: 28 Mar, 2014 कविता में

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कभी-कभी इस दिल के टूटने पर इंसान किस कदर टूट जाता है और क्या कुछ कर गुजरता है अपने जीवन में बस उसी को दर्शाने कि कोशिश की है अपनी इस ग़ज़ल में..उम्मीद करता हूँ आपको जरुर पसंद आएगी..

आकाश तिवारी


artworks-000025611834-cpcu27-originalउसने मेरे जख्मों को यूँ ही बेजार बना दिया,
मेरे अश्कों को अपने गले का हार बना दिया,
जब देखा सच्ची मुहब्बत पर उनकी यूँ बेरुखी.
तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया….


किसी को अपनी दास्ताने आशिकी सुनाई हमने,
किसी का दर्द मयखाने में भुलाया हमने,
जब लोगों ने दर्द का हमें सरकार बना दिया.
तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया….


कहीं बेदर्द ग़ज़लों की महफ़िल सजाई हमने,
कहीं बुझते चिराग में फिर से आग लगे हमने,
जब लोगों की तारीफों ने हमें कर्जदार बना दिया.
तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया….


हर-पल हर-सफ़र था बस उसको ही चाहा हमने,
जो ख़्वाब थे ज़िन्दगी में रो-रोकर भुलाया हमने,
जब उसने कब्र को हमारा घरबार बना दिया,
तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया….



आशा करता हूँ की आपको मेरी ये ग़ज़ल पसंद आई होगी.बहुत जल्द एक नयी ग़ज़ल के साथ फिर आऊंगा.

आपका

=आकाश तिवारी=


आप सभी से अनुरोध है की मेरी कविताओं का इस्तेमाल अपने नाम पर कभी न करे क्योंकि ये कवितायेँ सिर्फ मेरी है और रजिस्टर्ड है.

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43 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashutosh Shukla के द्वारा
August 16, 2014

“जब लोगों ने दर्द का हमें सरकार बना दिया. तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया….” अद्वितीय पंक्तियाँ ‘तिवारी जी’

jalaluddinkhan के द्वारा
April 7, 2014

दर्द को ग़ज़ल में पिरोने का हुनर है आप में,एक अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 7, 2014

    जलालुद्दीन जी, प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से शुक्रिया..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 7, 2014

कहीं बुझते चिराग में फिर से आग लगायी हमने,…. बहुत सुन्दर गजल …सुन्दर भाव …भ्रमर५

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 7, 2014

    भ्रमर जी, प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से शुक्रिया..

atul के द्वारा
April 7, 2014

आकाशजी        बहूत खूब                            अतुल

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 7, 2014

    अतुल जी, प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से शुक्रिया..

deepak pande के द्वारा
April 5, 2014

हर-पल हर-सफ़र था बस उसको ही चाहा हमने, जो ख़्वाब थे ज़िन्दगी में रो-रोकर भुलाया हमने, जब उसने कब्र को हमारा घरबार बना दिया, तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया… WAAH BAHUT KHOOB AAKASH JEE

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 6, 2014

    दीपक जी, गज़ल पसंद आयी आपको सुनकर दिल बहुत खुश हुआ. प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से शुक्रिया..

laxmikant के द्वारा
April 5, 2014

Nice Gaza l..Your great sir

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    April 6, 2014

    Mr. Laxmikaant, thanks for support.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 29, 2014

जब लोगों की तारीफों ने हमें कर्जदार बना दिया तो मोहब्बत को हमने अपना रोज़गार बना दिया ,आपकी ये पंक्तिया मुझे बहुत अच्छी लगीं आकाश जी ,हार्दिक बधाई .

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 30, 2014

    निर्मला जी, आपको मेरी लिखी कुछ पंक्तियाँ बेहद पसंद आयी जानकार बहुत ख़ुशी हुई. प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया.

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 29, 2014

उसने मेरे जख्मों को यूँ ही बेजार बना दिया, मेरे अश्कों को अपने गले का हार बना दिया प्रिय श्री आकाश जी ” क्या बात है बहुत खूब गजब गजब अनुभूति | शब्दो ने भावो की गहराई को जैसे समेत लिया हो | बस अब मंच को इसी अंदाज से लबालब कर दीजिये |

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 29, 2014

    आदरणीय श्री बाजपेयी जी, आपको गज़ल पसंद आयी सुनकर ख़ुशी हुई..आपकी आज्ञा का पालन होगा.

jlsingh के द्वारा
March 29, 2014

पुन: प्रकाशित की गयी रचना भी ऐसी लगी जैसे पहली बार पढ़ रहा हूँ. आदरणीय आकाश जी, शाही जी, आपलोगों से mere विनती है कि यूं ही बीच बीच में दर्शन दे दिया करें मंच आपलोगों का ही है आपके आंगन में अब नए नए फूल खिलने लगे हैं, आपको भी खुशी होती होगी किआ आपके ही आँगन में कितने लोगों ने अपना घरबार बना लिया जब से आपने मुहब्बत को अपना रोजगार बना दिया… सादर!

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 29, 2014

    आदरणीय सिंह जी, आपकी प्रतिक्रिया पाकर ख़ुशी हुई..सच कहा आपने ख़ुशी होती है जब देखता हूँ कि मंच पर ढेरो फूल खिल चुके है..

aman kumar के द्वारा
May 20, 2013

उसने मेरे जख्मों को यूँ ही बेजार बना दिया, मेरे अश्कों को अपने गले का हार बना दिया, जब देखा सच्ची मुहब्बत पर उनकी यूँ बेरुखी. बहुत अच्छी प्रस्तुति १

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 30, 2014

    अमन जी, प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद..

May 14, 2013

मुहब्बत और व्यापार को एक केंद्र पर लाती हुई रचना………………सिस्टम से शिकायत को बहुत ही संजीदा ढंग से व्यक्त करती है………………….पर मेरे समझ से तो प्यार कुछ ऐसा होता है……………….बाकी प्यार को लेकर जो भी अवाधार्नाएं पाली गई है या तो उनमें बचपना झलकता है या फिर मुर्खता……………… शायद प्यार को किसी ने समझा ही नहीं, कोई मुझसे भी तो पूछे प्यार क्या होता है? इसमे न मिलने की ख़ुशी, न बिछड़ने का गम होता है, न यह किसी से अधिक, न किसी से कम होता है, न ही यह सुखा , न ही नम होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई आम , न कोई खास होता है, न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई तृप्ति, न कोई उपवास होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जीत, न कोई हार होती है, न कोई बद्दुवा, न कोई दुआ होती है, न किसी से ना, ना हाँ होती है. सच तो यह है;आँखों से मिलने से पहिले और होठों के मिलने के बाद सिर्फ प्यार होता है. इसमे ना कोई हीर, ना राँझा होता है, न कोई अलग, न जुड़ा होता है, न कोई बंदा, न खुदा होता है. सच तो यह है, तुमसे, उससे, मुझसे हम सबसे प्यार जुदा होता है. इसमे न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई इजहार, न कोई इंकार होता है, न यह एक बार, न हजार बार होता है. प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जिस्म, न कोई जान होता है, न किसी का नाम, न कोई बदनाम होता है, प्यार से पहिले और प्यार के बाद, खुदा से नहीं खुद से पूछो क्या होता? मेरे ख्याल से प्यार ने एक बार होता है, न हजार बार होता है, प्यार से पहिले………… ……………….अनिल कुमार ‘अलीन’

    bhagwanbabu के द्वारा
    May 14, 2013

    अनिल जी … बातो बातो मे आपने.. बड़ी ही गुढ बाते कह दी आपने… बड़ी ही सुन्दर आध्यात्मिकता की ओर ले जा रहे थे आप.. जहाँ कुछ नही होता.. सिर्फ तू ही तू… या फिर कहिए न तू न मै.. कुछ नही होता.. अब आनन्द ही आनन्द..  बहुत बहुत धन्यवाद… . आकाश जी आपकी रचना भी बहुत अच्छी लगी… धन्यवाद… http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/05/05/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E2%80%9C%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A6%E2%80%9D-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82/

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    अलीन साहब.. गजब की व्याख्या की है आपने मुहब्बत की…सचमुच बहुत अच्छी और बहुत अच्छे….. आकाश तिवारी..

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    बाबू जी, सचमुच अलीन साहब ने बहुत अच्छी पंक्तियाँ लिखी है,, आप सब का प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया,.. आकाश तिवारी

May 14, 2013

मुहब्बत और व्यापार को एक केंद्र पर लाती हुई रचना………………सिस्टम से शिकायत को बहुत ही संजीदा ढंग से व्यक्त करती है………………….पर मेरे समझ से तो प्यार कुछ ऐसा होता है……………….बाकी प्यार को लेकर जो भी अवाधार्नाएं पाली गई है या तो उनमें बचपना झलकता है या फिर मुर्खता……………… शायद प्यार को किसी ने समझा ही नहीं, कोई मुझसे भी तो पूछे प्यार क्या होता है? इसमे न मिलने की ख़ुशी, न बिछड़ने का गम होता है, न यह किसी से अधिक, न किसी से कम होता है, न ही यह सुखा , न ही नम होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई आम , न कोई खास होता है, न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई तृप्ति, न कोई उपवास होता है. सच पूछो तो प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जीत, न कोई हार होती है, न कोई बद्दुवा, न कोई दुआ होती है, न किसी से ना, ना हाँ होती है. सच तो यह है;आँखों से मिलने से पहिले और होठों के मिलने के बाद सिर्फ प्यार होता है. इसमे ना कोई हीर, ना राँझा होता है, न कोई अलग, न जुड़ा होता है, न कोई बंदा, न खुदा होता है. सच तो यह है, तुमसे, उससे, मुझसे हम सबसे प्यार जुदा होता है. इसमे न कोई दूर, न कोई पास होता है, न कोई इजहार, न कोई इंकार होता है, न यह एक बार, न हजार बार होता है. प्यार से पहिले और प्यार के बाद, सिर्फ प्यार होता है. इसमे न कोई जिस्म, न कोई जान होता है, न किसी का नाम, न कोई बदनाम होता है, प्यार से पहिले और प्यार के बाद, खुदा से नहीं खुद से पूछो क्या होता? मेरे ख्याल से प्यार ने एक बार होता है, न हजार बार होता है, प्यार से पहिले………… ……………….अनिल कुमार ‘अलीन’ http://merisada.jagranjunction.com/2012/04/30/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9b%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0/

आर.एन. शाही के द्वारा
May 14, 2013

सचमुच काफ़ी अच्छा लगा आकाश जी । इधर फ़िर एक अच्छे अन्तराल के बाद आज मंच का मुखपृष्ठ खोला, तो आप की चिरपरिचित तस्वीर फ़ीचर लिस्ट में देखकर सचमुच अच्छा लगा । यह साइबर कैफ़े जिसमें बैठे दिख रहे हैं, यदि यह कोई नया ठिकाना है, तो मोहब्बत को रोज़गार बनाने वाली पंक्तियाँ सटीक बैठती प्रतीत होती हैं । खुश-आमदीद !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    वाह-वाह क्या बात है……. आदरणीय श्री शाही जी का मेरे ब्लॉग पर बहुत-बहुत स्वागत और अभिनन्दन है…… मै आकाश तिवारी धन्य हो गया जो आपके कमेन्ट मिले……….. काफी अरसा बीत गया जब हम सब एक साथ ब्लॉग पोस्ट किया करते थे और बाते शेयर किया करते थे…. माफ़ी चाहूँगा शाही जी..आपने जो आंकलन किया वो सरासर गलत है..दरअसल मै अपने ऑफिस में हु और मै आज भी वाही आकाश हूँ जिसे आपने 2 पहले देखा था… आप आये आपने अपनी प्रतिक्रिया दिया बहुत-बहुत धन्यवाद..बस अब सोचता हूँ हम सब फिर आये और एक साथ लिखे… आपका आकाश तिवारी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    2 साल पहले…

    आर.एन. शाही के द्वारा
    May 16, 2013

    ग़लत आकलन के लिये साँरी आकाश जी । आपके कार्यालय के स्टाफ़ डेस्क्स मुझे इंटरनेट ढाबे के स्ट्रक्चर से मिलते-जुलते लगे, इसलिये यह भ्रांति हुई । अक्सर कैफ़ेज़ में सुदूरवर्त्ती प्रेमी नेट पर एकदूसरे से मिलकर चैटिंग आदि करते ही हैं, जो एक प्रकार से ढाबे वालों का रोज़गार हुआ । कुछ ऐसी ही दूर की कौड़ी ले आया था मैं, जिसके लिये खेद है । हम एकसाथ पुन: अवश्य लिखेंगे ।

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    आदरणीय श्री शाही जी, आपने सॉरी बोलकर मुझे बहुत अपमानित कर दिया….अब शायद कभी भी आपके गलत आंकलन को बता न सकूँगा… आकाश तिवारी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    कौशिक जी, प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया,.. आकाश तिवारी

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 6, 2013

उसने मेरे जख्मों को यूँ ही बेजार बना दिया, मेरे अश्कों को अपने गले का हार बना दिया, जब देखा सच्ची मुहब्बत पर उनकी यूँ बेरुखी. तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया… आकाश भाई जब दर्द सहा नहीं गया तो यही तो होना ही था …सुन्दर गजल भ्रमर ५

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 9, 2013

    आदरणीय श्री सुरेन्द्र जी, हमेशा की तरह आपका बहुत बहुत शुक्रिया .. बस यूँ साथ देते रहिये…यही उम्मीद है… आकाश तिवारी

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 6, 2013

उसने मेरे जख्मों को यूँ ही बेजार बना दिया, मेरे अश्कों को अपने गले का हार बना दिया, जब देखा सच्ची मुहब्बत पर उनकी यूँ बेरुखी. तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया… आकाश भाई ..दर्द जब सहा नहीं गया तो यही होना ही था ..सुन्दर गजल भ्रमर ५

shashi bhushan के द्वारा
May 6, 2013

आदरणीय आकाश जी, सादर ! “”कहीं बेदर्द ग़ज़लों की महफ़िल सजाई हमने, कहीं बुझते चिराग में फिर से आग लगाईं हमने, जब लोगों की तारीफों ने हमें कर्जदार बना दिया. तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया….”" सुन्दर ! भावपूर्ण !

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 9, 2013

    आदरणीय शशि जी, प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया.. आकाश तिवारी

alkargupta1 के द्वारा
May 5, 2013

आकाश जी , एक लम्बे अन्तराल के पश्चात आपकी बढ़िया ग़ज़ल पढ़ी इतने दिनों बाद मंच पर देख कर बहुत अच्छा लगा पुनरागमन हेतु स्वागत

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 9, 2013

    आदरणीया अल्का जी, मंच पर बेशक मेरी वापसी बहुत दिनों बाद हुई मगर आते ही आप जैसे वरिष्ठजन का अगर आशीर्वाद मिल जाए तो क्या बात है…. बहुत बहुत शुक्रिया मेरी गजल पर प्रतिक्रिया हेतु,… आकाश तिवारी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 4, 2013

जब कम लिखेंगे तो चुराई जायेंगी छुप छुप के उन्हें सुनाई जाएँगी बशोक आप तो मशरूफ हुए चोरी को उन्होंने रोजगार बना लिया खुशामदीद मुबारक हो.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 4, 2013

    आदरणीय कुशवाहा जी, आपकी प्रतिक्रिया समझ पाना इतना आसान नही..बहुत बहुत शुक्रिया प्रतिक्रिया हेतु.. आकाश तिवारी

    jlsingh के द्वारा
    May 11, 2013

    हर-पल हर-सफ़र था बस उसको ही चाहा हमने, जो ख़्वाब थे ज़िन्दगी में रो-रोकर भुलाया हमने, जब उसने कब्र को हमारा घरबार बना दिया, तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया…. सोचा यही पर इन पंक्तियों को न्योछावर कर दूं! क्योंकि बुजुर्गियत में भी चुराना कर गजलें गाना .. हूजेरा आला ये कैसा ब्यवहार बना लिया! ….हा… हा … :) :)

    jlsingh के द्वारा
    May 11, 2013

    हर-पल हर-सफ़र था बस उसको ही चाहा हमने, जो ख़्वाब थे ज़िन्दगी में रो-रोकर भुलाया हमने, जब उसने कब्र को हमारा घरबार बना दिया, तो मुहब्बत को हमने अपना रोजगार बना दिया…. सोचा यही पर इन पंक्तियों को न्योछावर कर दूं! क्योंकि बुजुर्गियत में भी चुरा कर गजलें गाना .. हूजेरा आला, ये कैसा ब्यवहार बना लिया! ….हा… हा … आदर सहित! आप दोनों (कुशवाहा जी और आकाश जी) की जुगलबंदी का बहुत बहुत आभार!

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    JL सिंह जी, प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया,.. आकाश तिवारी


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